चंपावत। शिशुओं के विकास की देखरेख करने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों की चंपावत जिले में खुद की सेहत बहुत ठीक नहीं है। 75 प्रतिशत से अधिक केंद्रों के पास अपने भवन नहीं हैं। 55 प्रतिशत केंद्र प्राथमिक स्कूल के एक कमरे में चल रहे हैं। 40 प्रतिशत केंद्र किराये पर हैं। अब अगले दो साल में ये केंद्र किराये के भवन से निजात पा जाएंगे। चंपावत जिले के लिए 160 नए आंगनबाड़ी केंद्र मंजूर किए गए हैं।
चंपावत जिले में मिनी और पूर्ण श्रेणी के कुल 681 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। ये केंद्र छह माह से छह साल तक के 19 हजार शिशुओं के शारीरिक विकास और स्वास्थ्य की जांच, टीकाकरण, सफाई और जागरूक करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके अलावा पांच हजार से अधिक धात्री और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, स्वास्थ्य, पोषाहार का दायित्व इन केंद्रों पर है। आंगनबाड़ी केंद्रों का काम शिशुओं और प्री-स्कूल शिक्षण आदि है। इन केंद्रों के जरिए छह साल की उम्र तक के शिशुओं का शारीरिक और मानसिक विकास किया जाता है। इन केंद्रों में से अधिकांश का आधारभूत ढांचा बेहतर नहीं है।
जिले में सिर्फ 150 केंद्र विभागीय भवनों में संचालित हैं। जिले में 145 केंद्र किराये पर चल रहे हैं। स्कूल परिसर में 290 केंद्र चल रहे हैं। अब चंपावत जिले में 160 नए आंगनबाड़ी केंद्र शासन ने मंजूर किए हैं।
24 केद्रों को आदर्श बनाने का भी है प्रस्ताव
चंपावत। आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए बच्चों को स्मार्ट बनाया जाएगा। इसके लिए इन केंद्रों को मॉडल बनाने की कवायद शुरू की गई है। चंपावत जिले में पहले चरण में 24 केंद्रों को इसके लिए चयनित किया गया है। इन केंद्रों में आधारभूत सुविधाओं को बढ़ाने के साथ आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा।
जिले के 24 केंद्रों में बिजली, पेयजल, फर्नीचर के अलावा मोबाइल नेटवर्क, डिजिटल स्क्रीन जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी ताकि यहां पंजीकृत शिशुओं को अन्य प्ले स्कूल में मिलने वाली सभी सुविधाएं दी जा सके। डीपीओ आरपी बिष्ट का कहना है कि आदर्श केंद्रों का प्रस्ताव निदेशालय भेजा गया है। बजट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ये 24 आंगनबाड़ी केंद्र बनेंगे आदर्श
बाराकोट, बैड़ाबैड़वाल, रैघांव, कनवाड़, पुनाकोट, जौलाड़ी, जैरोली, गरसाड़ी, गागर, लधौन, बस्तिया, चंपावत, चैकुनीबोरा, फागपुर, तल्ली खटोली, आमबाग, लटोली, ललुवापानी, ठांटा, कलीगांव, पाटन पाटनी, चमोला, फोर्ती और लोहाघाट।