पंचेश्वर बांध के साथ ही टनकपुर बैराज से नेपाल को सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराने को चैनल (नहर) निर्माण की कवायद तेज हो गई है। शुक्रवार को केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव अमरजीत सिंह ने पंचेश्वर बांध परियोजना व एनएचपीसी के अधिकारियों के साथ टनकपुर बैराज का निरीक्षण कर 1991 की संधि के तहत बैराज से नेपाल को सिंचाई के लिए चैनल का निर्माण जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यहां दौरे के बाद केंद्रीय सचिव पंचेश्वर बांध स्थल के लिए रवाना हुए।
भारत-नेपाल के बीच सहमति के बाद पंचेश्वर बांध परियोजना निर्माण की कवायद तेज हो गई है। मानीटरिंग के लिए नेपाल के कंचनपुर जिला मुख्यालय महेंद्रनगर में बाकायदा दोनों देशों का ज्वाइंट कार्यालय खोला जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक तीन-तीन साल के लिए दोनों के अधिकारी परियोजना के सीईओ के पद पर तैनात रहेंगे। वर्तमान में तीन साल के लिए इस पद पर नेपाल के डॉ. महेंद्र गुरूंग की तैनाती हुई है। अधिकारियों के दल-बल के साथ यहां पहुंचे केंद्रीय जल संसाधन सचिव सिंह ने शुक्रवार को टनकपुर बैराज का निरीक्षण किया। उन्होंने एनएचपीसी की टनकपुर परियोजना के बारे में जानकारी हासिल की। टनकपुर पावर स्टेशन के चीफ इंजीनियर पीके गुप्ता ने बताया संधि के तहत नेपाल छोर पर बैराज से करीब 150 मीटर उत्तर की ओर नेपाल को चैनल दिया जाना है। 1200 मीटर लंबे और चार मीटर ऊंचाई के इस चैनल से नेपाल को 1000 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की जाएगी।
उन्होंने बताया वर्ष 2017-18 में चैनल का निर्माण शुरू किया जाना है, जिसके निर्माण में करीब दो साल का समय लगेगा। इस मौके पर एनएचपीसी के प्रबंध निदेशक बलराम जोशी, पंचेश्वर बांध परियोजना के सीईओ डा. महेंद्र गुरूंग के अलावा दोनों देशों के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।