चंपावत। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य जस्टिस डी मुरुगेशन ने कहा कि जागरूकता की कमी मानवाधिकारों की राह का रोड़ा है। इसके लिए समाज के विभिन्न वर्गों को जागरूक किया जाना जरूरी है। शुक्रवार को यहां एक दिनी कार्यशाला में उन्होंने आम नागरिकों के रोजमर्रा की जरूरत जैसे खाद्य सामग्री, दवाओं आदि की रेंडम सैंपलिंग करने के निर्देश दिए।
जस्टिस मुरुगेशन ने कहा कि जरूरतमंदों के लिए विभिन्न सरकारी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन सही क्रियान्वयन की कमी के चलते इसका लाभ हकदार लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थलों के भ्रमण, कार्यशाला में मिले सुझावों की रिपोर्ट तैयार कर आयोग के जरिए सरकार को दी जाएगी। आयोग को प्राप्त होने वाली शिकायतों, उनके निस्तारण की स्थिति आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जा रही है।
आयोग के निदेशक डॉ. संजय दुबे, एके जैन, डीएम डॉ. अहमद इकबाल ने मानवाधिकार के संरक्षण के लिए सुझाव दिए। कार्यशाला में भोजन का अधिकार, आरटीई, स्वास्थ्य का अधिकार, जस्टिस अधिनियम के तहत जिला स्तरीय अधिकारियों की टीमों ने मानवाधिकार से जुड़े मामलों पर सुझाव दिए। आयोग के सामने सामाजिक पेंशनों के मानकों में सुधार, खाद्य पदार्थों की जांच के तरीके विकसित करने के सुझाव रखे गए।
राजस्व पुलिस को दिए गए कार्य रेगुलर पुलिस को देने, न्यायिक बंदीगृह जेल विभाग को स्थानांतरित करने, ब्लड बैंक खोलने, पुरानी दवाइयों की पूर्ति पर रोक लगाने के लिए सिस्टम को बेहतर बनाने के सुझाव दिए। कार्यशाला में एडीएम जेएस राठौर, सीडीओ हरगोविंद भट्ट, एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, सीएस डोभाल, निर्मला बिष्ट, नरेश दुर्गापाल, डीडीओ विवेक उपाध्याय, सीएमओ विनोद टोलिया, सीओ विमल आचार्य, आरएस रौतेला, डीईओ सत्यनारायण, डीपीओ शैली प्रजापति, तहसीलदार नीलू चावला आदि थे।
विज्ञान संसाधन केंद्र कुलेठी पहुुंची। टीम ने पुस्तकालय, कंप्यूटर लगने की सराहना की। यहां संस्था के सदस्य अनुपम बिष्ट ई-लर्निंग, यू-ट्यूब चैनल के लिए वीडियो बनाने, अपलोड करने की जानकारी छात्रों को देते हैं। वहीं शक्तिपुरबुंगा आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्था पर आयोग ने आंगनबाड़ी कार्यकत्री दीपा पांडेय की सराहना की। दीपा ने बताया कि इस केंद्र में कुल 52 बच्चे रजिस्टर्ड हैं। सभी बच्चों का वजन मानकों के अनुरूप है। कुपोषण की भी कोई शिकायत नहीं है।
सामाजिक कार्यकर्ता और तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त रीता गहतोड़ी ने आयोग के सदस्य जस्टिस डी मुरुगेशन को ज्ञापन दिया। जिसमें जिला अस्पताल में ब्लड बैंक खोलने की मांग की गई। कहा कि ब्लड बैंक भवन बने तीन साल से अधिक का वक्त हो चुका है, मगर इसके संचालन में तकनीकी दिक्कत आ रही है। ब्लड बैंक का संचालन शुरू न होने से गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है।