बनबसा नगर पंचायत कार्यालय भवन।
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जिले के प्रवेशद्वार बनबसा सबसे नई नवेली नगर पंचायत है। मगर इसके हाल किसी एकल शिक्षक के प्राइमरी स्कूल जैसी है। पूरी पंचायत की जिम्मेदारी एकमात्र कर्मचारी पर है। यहां तक कि कार्यालय को खोलने-बंद करने का जिम्मा भी अकेले अधिशासी अधिकारी (ईओ) का है।
चंपावत जिले की चार नगर निकायों में से बनबसा का नंबर चौथा है। 2017 तक इस पंचायत का काम टनकपुर के ईओ संभालते थे। इस साल के शुरू में नौनी राम को प्रभारी ईओ बनाकर खटीमा से भेजा गया। लेकिन नगर पंचायत में उनके अलावा कोई अन्य कर्मचारी नहीं है। न कार्यालय के कामकाज को निपटाने के लिए और न ही करों की वसूली या साफ-सफाई की निगरानी के लिए कर्मचारी है।
कर के रूप में नहीं मिला एक भी रुपया
नगर पंचायत को बने तीन साल से अधिक हो गए हैं, लेकिन पंचायत ने अभी तक एक ढेले की आय नहीं की है। भवन कर, तहबाजारी या दूसरे मदों से उसे अभी तक एक भी रुपया नहीं मिला है। प्रभारी ईओ नौनी राम का कहना है कि नगर पंचायत ने इन करों से संबंधित उप नियम तो बना लिए हैं, मगर इन्हें अभी लागू नहीं किया जा सका है। अब कर वसूली का काम नए बोर्ड के गठन के बाद ही शुरू हो सकेगा। अलबत्ता राज्य वित्त से दो किस्त में उसे 1.25 करोड़ रुपये जरूर मिले हैं।
कोट
नगर पंचायत में एक भी कर्मचारी की तैनाती नहीं है। कर्मियों की कमी से जरूरी कामकाज निपटाना मुश्किल हो रहा है। कर संग्रहण कर्ता से लेकर निरीक्षक तक के नहीं होने से कर वसूली भी नहीं हो पा रही है। पदों को भरने के लिए कई बार निदेशालय को खत भेजा गया है। -नौनी राम, प्रभारी अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, बनबसा।
कर्मचारी एक, मगर वार्ड सात
बनबसा नगर पंचायत में तीन साल बाद भी कर्मचारियों की तैनाती नहीं हो सकी है। भले ही यहां कर्मचारी एक ही है, लेकिन नगर पंचायत के वार्ड सात हैं। और जल्द ही अध्यक्ष के अलावा इन सात वार्डों के चुनाव होंगे।