फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेरी लड़ाई व्यक्ति नहीं, भ्रष्टाचार के खिलाफ, कमजोर नहीं होगी आवाज

विज्ञापन
लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल। - फोटो : CHAMPAWAT
विज्ञापन
चंपावत। टनकपुर-जौलजीबी (टीजे) मोटर मार्ग पर कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल के तेवर पहले की तरह तल्ख हैं। भाजपा आलाकमान की ओर से नोटिस दिए जाने की चर्चा के बीच उनके तेवर में कोई अंतर नहीं आया है। अमर उजाला से फोन पर बात करते हुए फर्त्याल ने कहा कि उन्हें अभी तक पार्टी की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है। नोटिस मिलने के बाद वह बेबाकी से जवाब देंगे। कहा कि वह नियम 58 के तहत 2019 में भी विधानसभा में सवाल उठा चुके हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी आवाज थमेगी नहीं, बल्कि और तेज होगी।
विज्ञापन

लगातार दूसरी बार विधायक बने भाजपा नेता फर्त्याल ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति से प्रेरित है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने से वह भाजपा की छवि को बेहतर कर रहे हैं। विधायक ने कहा कि टनकपुर-जौलजीबी (टीजे) रोड पर लाभ लेने वाले पर कार्रवाई नहीं हो रही है लेकिन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। इससे विरोधी दलों को अंगुली उठाने का मौका मिल रहा है।
फर्त्याल की बेबाकी भविष्य की सियासत के संकेत
चंपावत। तीन साल से लटके टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग पर गतिरोध खत्म हो गया है लेकिन इस रोड को लेकर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर सियासत खत्म नहीं हुई है। इस मामले में असहज हुए भाजपा नेतृत्व ने लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल को नोटिस दिया है। इस नोटिस के बाद के सियासी हालात चाहे जो भी हों, विधायक और पार्टी के बीच रिश्तों में बीते एक साल से कई बार तल्खी रही।
विज्ञापन

विधायक फर्त्याल का भाजपा नेतृत्व से एक साल से कम समय में दूसरी बार टकराव हुआ है। टीजे रोड के दूसरे पैकेज में विधायक की दलील के उलट पुराने ठेकेदार को ठेका मिलने से भाजपा सरकार और विधायक के बीच तनातनी बनी हुई है। 23 सितंबर को हुए एक दिनी विधानसभा सत्र में उन्होंने इस मामले को नियम 58 में उठाने का प्रयास किया और अब भी फर्त्याल और उनके समर्थक कार्यकर्ताओं के तेवर तीखे हैं।
बेबाकी के लिए मशहूर विधायक का भाजपा नेतृत्व से पिछले साल अक्तूबर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी को लेकर भी विवाद रहा। उनके सार्वजनिक विरोध के चलते पिछले साल अक्तूबर में भाजपा को 72 घंटों के भीतर पहले घोषित प्रत्याशी को बदलने को मजबूर होना पड़ा। कुछ लोग विधायक के पार्टी से अलग राय को उनकी बेबाकी, तो कई राजनीतिक समीक्षक इसे उनकी भविष्य की राजनीति से जोड़ कर देख रहे हैं। दो बार जिला पंचायत सदस्य रहे फर्त्याल कुछ वक्त कांग्रेस में रहने के अलावा 2002 में बसपा से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। और 2005 से वह भाजपा में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें