श्रद्धालुओं को इस बार मां पूर्णागिरि देवी के दर्शन दूर से हो सकेंगे। मां के मंदिर वाली पहाड़ी में दरार बढ़ने के कारण प्रशासन ने यह फैसला लिया है। इस पर मंदिर के पुजारियों ने भी सहमति जताई है। नवरात्र (13 अक्तूबर) से नई व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
उत्तर भारत से हर साल लाखों श्रद्धालु मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए आते हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां आने वाले भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। अब तक भक्तगण देवी मां के दर्शन एक दो फीट की दूरी से कर लेते थे, लेकिन अब वे 10 फीट दूर से मां के दर्शन कर पाएंगे। मंदिर के हालात का जायजा लेकर लौटे पूर्णागिरि (टनकपुर) के एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने बताया कि मां पूर्णागिरि की पहाड़ी की दरार के मद्देनजर पुजारियों से बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया है।
मंदिर से एकदम चिपकी हुई बैरिकेडिंग को मुख्य मंदिर से दस फीट दूर खिसकाया जाएगा। इस दूरी से भी मां और नाभि के दर्शन ठीक से हो सकेंगे। मुख्य मंदिर के पास एक किलोग्राम से अधिक वजन के घंटियां भी हटाई जाएंगी। इस वक्त इस स्थान पर 100 से ज्यादा घंटियां हैं, जिसमें कई 10 किलो से ज्यादा के हैं। एसडीएम ने बताया कि इन घंटियों को काली मंदिर के नीचे शिफ्ट किया जाएगा।
बढ़ रही है चट्टान की दरार
मां पूर्णागिरि धाम की पहाड़ी की चट्टान पर कई जगह तीन से पांच इंच की दरार हैं। अब दो जगह ये दरार बढ़ गई है। तीन वर्ष में ये दरार करीब एक इंच बढ़ गई है। एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने बताया कि तीन साल पहले भूगर्भ वैज्ञानिकों ने स्केलिंग करके पहाड़ी में गिलास लगाया था, ताकि विस्तार होने पर गिलास टूट जाए। मुख्य मंदिर के नीचे दो जगह दरार पर फैलाव (गैप) बढ़ रहा है।
मां पूर्णागिरि धाम आस्था का केंद्र होने के साथ ही जिले की धार्मिक पहचान भी है, इसकी सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत प्रभावी कदम उठाया जाना जरूरी है। मंदिर की सुरक्षा के लिए तकनीकी विशेषज्ञता वाले विभागों को समय रहते प्रयास करने होंगे।
-पंडित किशन तिवारी, अध्यक्ष, मां पूर्णागिरि मंदिर समिति
मां पूर्णागिरि के मुख्य मंदिर में जगह काफी कम है। साथ ही दरारों से पहाड़ी की संवेदनशीलता भी बढ़ गई है। ऐसे में मंदिर में अधिक वजन खतरे की घंटी है। मां के दर्शन के तुरंत बाद श्रद्धालुओं के आगे बढ़ने की व्यवस्था की जा रही है।
-नरेश दुर्गापाल, एसडीएम, पूर्णागिरि तहसील