स्कंद पुराण में मां पूर्णागिरि शक्तिपीठ की दिव्य शक्ति का वर्णन है। पूर्णागिरि शक्तिपीठ शारदा से लगी पर्वत श्रृंखलाओं के शिखर पर स्थित है, जो देवी सती की नाभि स्थली के रूप में विख्यात है। शक्तिस्वरूपा देवी सती की अलौकिक शक्ति के प्रमाण आज भी इस शक्तिपीठ में विद्यमान है। चैत्र और शारदीय नवरात्रों में हर साल देश के कोने-कोने से लाखों भक्त शक्तिपीठ के दर्शन को पहुंचते हैं।
हिमालय से निकलने वाली पवित्र शारदा में स्नान कर भक्तजन पूर्णागिरि धाम में पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगते हैं। माना जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई भक्तों की मुराद अवश्य पूरी होती है। भक्तों की आस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां सदियों से लगने वाला धार्मिक मेला देवभूमि उत्तराखंड में लंबी अवधि तक चलने वाले मेलों में से एक है। चैत्र नवरात्रों में यहां हर साल तीन माह का सरकारी मेला लगता है।
जिम कार्बेट को हुए थे दिव्य ज्योति के दर्शन
पूर्णागिरि क्षेत्र के जंगल में प्रवास के दौरान प्रसिद्ध अंग्रेज शिकारी जिम कार्बेट को पूर्णागिरि में अलौकिक दिव्यज्योति के दर्शन हुए थे, जिसका रोचकपूर्ण उल्लेख जिम कार्बेट ने अपनी दि टैंपल टाइगर में भी किया है।
नेपाल से भी जुड़ी है धार्मिक आस्था
नेपाल के प्रसिद्ध बाबा सिद्धनाथ धाम का महत्व भी पूर्णागिरि धाम से जुड़ा है। बाबा सिद्धनाथ मां पूर्णागिरि के अनन्य भक्त थे। कहा जाता है कि एक बार बाबा बगैर अनुमति देवी के दर्शन को उनके शयनकक्ष में प्रवेश कर गए, इससे देवी को क्रोध आ गया और बाबा के टुकड़े-टुकड़े कर हवा में उछाल दिए। बाबा के शरीर का एक टुकड़ा शारदा के पार नेपाल के खल्ला नामक स्थान में गिरा। बाद में जब देवी को बाबा की भक्ति का पता चला तो उन्होंने बाबा को वरदान दिया कि मेरे दर्शन के बाद हर भक्त बाबा सिद्धनाथ के दर्शन करेगा तभी उसकी यात्रा और मनोकामना पूर्ण होगी। यही वजह है कि मां पूर्णागिरि के दर्शन करने के बाद भक्त बाबा सिद्धनाथ के दर्शन के लिए नेपाल जाते हैं।
पूर्णागिरि में भक्तों की आवाजाही जारी
शारदीय नवरात्र में मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही का क्रम लगातार बना हुआ है। बुधवार को द्वितीय नवरात्र पर करीब आठ हजार से ज्यादा भक्तों ने देवी के दरबार में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामनाएं की है। यात्रियों का आवाजाही से पूर्णागिरि के अलावा टनकपुर, बनबसा और भारत-नेपाल सीमा पर इन दिनों खासी चहल-पहल बढ़ गई है। इधर, भीड़ को नजरअंदाज कर बिजली विभाग के नुमाइंदे धाम की बिजली व्यवस्था के प्रति उदासीन बने हुए हैं। पूर्णागिरि व्यापार मंडल अध्यक्ष भुवन चंद्र पांडेय, मंदिर समिति अध्यक्ष किशन तिवारी, मोहन तिवारी, महेश पांडेय आदि का कहना है कि टुन्यास से ऊपर के क्षेत्र में लो-वोल्टेज की समस्या और मंगलवार रात बिजली की आंखमिचौली से दुकानदार और यात्रियों को काफी परेशानी हुई। उन्होंने बिजली व्यवस्था को जल्द दुरुस्त किए जाने की मांग की है।