चंपावत। चार ब्लॉक और चार नगर निकाय वाला चंपावत जिला मैदान और पहाड़ का मिश्रण है। भौगोलिक और जैवविविधता के बावजूद तीन लाख की आबादी वाले नेपाल सीमा से लगे इस गांव में जितना विकास हुआ नहीं, उससे बहुत ज्यादा विकास का शोर है। ये हाल, तब है, जब जिले के विकास के लिए धन और योजनाओं की कमी नहीं है। सितंबर 1997 में सृजित चंपावत जिले में रोजाना 48,95,000 रुपये विकास की योजनाओं पर खर्च हो रही है। फिर भी यह जिला विकास की छलांग लगाने के बजाय दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने में हांफ रहा है।
जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी दीप्तकीर्ति तिवारी ने बताया कि चंपावत जिले में 2022-23 में जिला प्लान, राज्य सेक्टर, केंद्र पुरोनिधानित, वाह्य सहायतित आदि योजनाओं की 1,78,67,32,000 रुपये से विकास की योजनाएं चल रहीं हैं। यानी जिले के विकास पर रोजाना औसतन 48,95,000 रुपये खर्च हो रहे हैं। राशि से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम, मनरेगा, आवास, पेयजल, स्वास्थ्य, समाज कल्याण समेत कई योजनाएं चलाई जा रहीं हैं। इसके बाद भी मैदान, पहाड़ से मिलकर बने चंपावत जिले का न तो आधारभूत ढांचा ढर्रे पर है और न ही दूरदराज के क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं मिल सकी हैं।
रोजगार के मोर्चे पर तो सबसे बुरे हाल हैं। अस्पताल, स्कूल, पेयजल, संचार जैसी जरूरी सुविधाओं की ग्रामीण क्षेत्रों में कमी से शहर और गांवों के विकास की खाई साफ दिख रही है। जिले के 51 गांवों में एएनएम, स्वास्थ्य उप केंद्र से लेकिन किसी तरह की स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। 53,953 परिवारों में से 19,000 से भी कम परिवारों के पास पेयजल कनेक्शन हैं। सड़क न होने से 43 से अधिक गांवों में बीमार लोगों को सड़क तक पहुंचाने के लिए डोली का आसरा लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जिले के विकास को आयना दिखाते आंकड़े
चंपावत जिले में 55,000 परिवारों में से 19,000 के पास ही पेयजल कनेक्शन है। बाकी परिवारों को प्यास बुझाने के लिए घर से बाहर दौड़ लगानी पड़ रही है।
दो दर्जन से अधिक गांवों को बैंकिंग सेवा के लाभ के लिए 15 किमी से अधिक दूरी तय करनी पड़ती है।
20198 बीपीएल परिवारों में से 500 से अधिक परिवार अब भी आवासहीन।
नेपाल सीमा से लगे गांवों सहित कुल 21 ग्रामीण क्षेत्रों में संचार सुविधा नहीं।
313 ग्राम पंचायतों में से 51 में किसी भी तरह की स्वास्थ्य सुविधा नहीं।
651 राजस्व गांवों में से 43 गांव अब भी सड़क से कटे हैं।
24,000 पंजीकृत सहित करीब 39,000 बेरोजगार।
विभिन्न योजनाएं मौजूदा वित्त वर्ष का परिव्यय (लाख रुपये में)
जिला योजना 4282.00
राज्य योजना 5620.00
केंद्र पुरोनिधानित 7901.97
वाह्य सहायतित 63.35
कुल योग 17867.32
मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में चंपावत जिले को मॉडल जिला बनाने के लिए तेेजी से काम हो रहा है। विकास योजनाओं के असरदार क्रियान्वयन के साथ समग्र कार्यनीति बनाई जा रही है। समयबद्धता और गुणवत्ता के लिए कार्यों की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। - नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
फिर भी नहीं हो सके ये काम
भवन पूरा होने के छह साल बाद भी टनकपुर और लोहाघाट के ट्रोमा सेंटर का संचालन शुरू नहीं हुआ।
वर्ष 2015 से दो बार शिलान्यास होने के बावजूद पूर्णागिरि रोपवे का काम शुरू नहीं हो सका।
श्यामलाताल पर्यटक आवास गृह वर्ष 2014 से पर्यटकों के लिए नहीं खुल सका।
यूपी के समय बने भवन के बावजूद कोल्ड स्टोर का संचालन शुरू नहीं हो सका।
चंपावत में रोडवेज डिपो नहीं, टनकपुर में आधुनिक रोडवेज स्टेशन की कमी।
वर्ष 2015 से संचालित चंपावत के सर्किट हाउस में स्टाफ की तैनाती नहीं।
टनकपुर-जौलजीबी रोड पर वर्ष 2016 से चूका में पुल का निर्माण लटका।
डैसली पावर स्टेशन का काम निर्धारित समय से दो साल बाद भी अधूरा।
जिले के किसी भी शहर में मास्टर प्लान नहीं, सीवर लाइन का अभाव।
चंपावत के राजबुंगा किले को संग्रहालय का रूप नहीं मिल सका।
चंपावत जिले में एक भी जगह औद्योगिक इकाई की स्थापना नहीं।
ब्लॉक और तहसील मुख्यालय बाराकोट में डिग्री कॉलेज नहीं।
चंपावत के रोजिन फैक्टरी परिसर की जमीन का उपयोग नहीं।
बनबसा में गैस एजेंसी सात साल बाद भी नहीं बन सकी।
चंपावत में जिला जेल का काम वर्ष 2012 से लटका है।
कूर्म सरोवर और डिप्टेश्वर झील का काम शुरू नहीं।
सिन्याड़ी की बीयर फैक्टरी का संचालन शुरू नहीं।
जिला मुख्यालय में ट्रंचिंग ग्राउंड का निर्माण नहीं।
चंपावत जिले में एक भी पार्किंग स्थल नहीं।
चंपावत जिले में पहला हेलीपैड भी अधूरा।
शुरू नहीं हो सका चंपावत का स्टेडियम।
लोहाघाट स्टेडियम का काम पूरा नहीं।
ये प्रमुख कार्य हुए
चंपावत की क्वैराला पंपिंग योजना पूरी हुई। साढ़े चार मेगावाट क्षमता का खेतीखान सोलर पावर प्लांट शुरू। एकीकृत नर्सिंग कॉलेज संचालन के लिए तैयार। गुमदेश, तल्लादेश की उप तहसीलों का संचालन। चंपावत के राजकीय पॉलीटेक्निक और आईटीआई को अपने भवन मिले। कोलीढेक झील का निर्माण पूरा कर चाय बागान को इको टूरिज्म से जोड़ा गया। एबटमाउंट में इको हट से पर्यटन योजना, देवीधुरा में स्वदेश दर्शन विरासत परिपथ योजना और गौड़ी पावर हाउस का संचालन शुरू।