चंपावत। सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता बेहतर करने के मकसद से इस साल आदर्श स्कूलों की अवधारणा शुरू हुई, मगर ये विद्यालय भी भरोसा नहीं जगा पा रहे हैं। इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या भी नहीं बढ़ पा रही है। उल्टा ये तादात फिलहाल पिछले साल की अपेक्षा 15 प्रतिशत कम हुई है।
सरकारी शिक्षा को संवारने के लिए प्रदेशभर में आदर्श विद्यालय की अवधारणा लाई गई। दूसरे कई जिलों में इन आदर्श स्कूलों के चलते छात्रों की संख्या में इजाफा हुआ, मगर चंपावत जिले में हालात नहीं बदले। यहां पिछले शिक्षा सत्र की अपेक्षा छात्रों की संख्या में गिरावट आ रही है।
जिले के चारों विकासखंडों में 504 प्राथमिक और 97 जूनियर हाईस्कूल हैं, इनमें हर विकासखंड में दो प्राथमिक और एक जूनियर हाईस्कूल को आदर्श विद्यालय बनाया गया। आदर्श स्कूलों की चहारदीवारी में रंग-रोगन आदि हो चुका है। पिछले साल इन स्कूलों में कुल मिलाकर 1052 छात्र-छात्राएं थे।
शिक्षकों की संख्या भी अन्य स्कूलों की अपेक्षा ज्यादा है। 8 प्राथमिक विद्यालयों में कुल 21 शिक्षक और 4 जूनियर हाईस्कूलों में 20 शिक्षक हैं, मगर इतनी बेहतर स्थिति के बावजूद फिलहाल छात्रों की संख्या घटकर 893 हो गई है। इन स्कूलों में पिछले साल की कुल छात्र संख्या के सापेक्ष 159 की कमी आई है।
आदर्श सरकारी स्कूल छात्र (2015) छात्र (2016)
1. मानढुगा प्राथमिक विद्यालय 34 43
2. लोहाघाट 133 76
3. पोखरी 66 66
4. गागर 77 81
5. मंच 40 41
6. नरसिंहडांडा 65 55
7. चामी 40 40
8. कामाज्यूला 70 73
9. पउ जूनियर हाईस्कूल 35 35
10. कानाकोट 59 73
11. महात्मा गांधी टनकपुर 366 250
12. इजड़ा 67 60