चंपावत। चंपावत में दो साल तक के बच्चों में ऑटिज्म के लक्षण दिख रहे हैं। बच्चों में संवाद की क्षमता कम हो रही है। इससे उनकी भावनाओं को समझने में दिक्कत हो रही है। बच्चों का देर से बोलने, एक ही शब्द को बार-बार दोहराने, अकेले रहने और चिड़ चिड़ापन जैसी समस्याएं हो रही हैं। ऐसी परिस्थिति में बच्चाें को मोबाइल से दूर रखना चाहिए। यह बात जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजूनाथ ने कही। उन्होंने लोगों को बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की सलाह दी है।
डॉ. मंजूनाथ ने बताया कि पिछले कुछ समय से दो साल तक के बच्चों में ऑटिज्म की बीमारी देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अभिभावक छोटे बच्चों को उन्हें चुप कराने के लिए मोबाइल देते हैं या मोबाइल पर कोई गाना, मूवी लगा देते हैं तो उनका ध्यान उसकी ओर चला जाता है। ऐसे में उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। उन्होंने बताया दो साल तक बच्चों को मोबाइल बिल्कुल भी नहीं देना चाहिए। जितना हो उनके पास रहकर उन्हें समझने की जरूरत है। संवाद
दो साल के बाद बच्चों को 15 मिनट के लिए मोबाइल दिया जा सकता है। दो साल से अधिक उम्र के बच्चों को करीब आधे घंटे तक मोबाइल चलाने के लिए दे सकते हैं। अभिभावकों को बचपन से ही इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कहीं मोबाइल देकर वे बच्चों के व्यक्तित्व विकास को कहीं रोक तो नहीं रहे हैं। बच्चों को ऑटिज्म से बचाने के लिए उन पर ध्यान देने की जरूरत है।
शुरुआत में इलाज जरूरी
चंपावत। डॉ. मंजूनाथ ने बताया कि इस बीमारी का एकाएक पता नहीं चलता है। दो साल बाद इसके लक्षण सामने आते हैं। ऐसे में मरीजों की स्पीच थेरेपी, प्ले थेरेपी और सोशल कम्युनिकेशन थेरेपी की जाती है।