जिले में हर साल सड़क हादसों में 40 से अधिक जिंदगियां खत्म हो रही हैं। मौतों के इस बढ़ते ग्राफ के पीछे मुख्य वजह शराब को माना जाता है। अब सर्वोच्च अदालत के एक फैसले से हादसों पर ब्रेक लगने की उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को एनएच और स्टेट हाइवे से 500 मीटर तक शराब की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया है।
चंपावत जिले में बीते छह वर्षों में 190 रोड हादसों में 239 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा 311 से अधिक लोग दुर्घटना में घायल हो चुके हैं। पुलिस और परिवहन विभाग का कहना है कि ये नौबत विभागों द्वारा नियमित अंतराल में हादसों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद है। इसकी बड़ी वजह चालकों द्वारा शराब पीकर वाहन चलाना बताया जा रहा है।
वहीं, रोड हादसों के वक्त इलाज की पुख्ता व्यवस्था की सिफारिश की जाती रही, मगर टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच के 150 किलोमीटर के फासले में कहीं भी आपात चिकित्सा सेवा नहीं है, जबकि अकेले चंपावत जिले में ही दो ट्रामा सेंटर (आपातकालीन चिकित्सा सुविधा केंद्र) भवन बन चुके हैं, लेकिन न टनकपुर और न ही लोहाघाट का ट्रामा सेंटर संचालित हो रहा है। दोनों केंद्र स्वास्थ्य विभाग को करीब एक साल पूर्व हस्तांतरित हो चुके हैं।
शराब की सात दुकानें सड़क किनारे
चंपावत जिले में टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच के अलावा एक राज्यमार्ग है। जिले की कुल 16 शराब की दुकानों में से इस वक्त इन दोनों स्थानों पर शराब की सात दुकानें हैं। एनएच पर सूखीढांग, सिन्याड़ी, चंपावत, लोहाघाट में दो, राज्यमार्ग पर पाटी एवं देवीधुरा में शराब की दुकानें हैं। शराब से जिले को इस वित्त वर्ष में करीब 33.5 करोड़ रुपए का राजस्व मिल रहा है। जिला आबकारी अधिकारी दीपाली साह का कहना है कि इन दुकानों से कुल आय का करीब 80 प्रतिशत राजस्व प्राप्त होता है, अगर ये दुकानें बंद होती हैं, तो राजस्व की भरपाई के लिए वैकल्पिक उपाय तलाशने होंगे।
सड़क दुर्घटनाओं में चालक की लापरवाही के अलावा शराबखोरी सबसे बड़ी वजह है। मोटर मार्गों के किनारे शराब की दुकानें होने से हादसों का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। विभाग ऐसी शराब की दुकान हटाने के लिए कई बार आग्रह भी कर चुका है। अदालत के फैसले से हादसों पर रोक लगेगी। -रश्मि भट्ट, एआरटीओ, चंपावत।