चंपावत। यदि आपका बेटा 18 साल से कम उम्र का है और बाइक चलाने की जिद कर रहा है तो यह खबर आपके काम की है। बेटे की जिद और आपका दयालु होना महंगा पड़ सकता है। चंपावत में एक पिता को नाबालिग बेटे के हाथ में बाइक देने पर 32 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई गई। उन्हें कोर्ट की कार्यवाही के दौरान खड़े होने की सजा भी भुगतनी पड़ी।
डूंगरासेटी गांव के एक नाबालिग को पुलिस ने 11 फरवरी 2020 को बाइक चलाते हुए पकड़ा था। वह बाइक के दस्तावेज भी नहीं दिखा सका। इस पर यातायात उप निरीक्षक ज्योति प्रकाश ने उसका चालान कर दिया। मामला कोर्ट तक पहुंच गया। नामिक अधिवक्ता विजय राय ने बताया कि नाबालिग के पिता ने जुर्म कबूल करते हुए सीजेएम की अदालत में प्रार्थनापत्र दिया।
सीजेएम अरुण बोहरा की अदालत ने नाबालिग के पिता पर धारा 181, 196, 199 ए एमवी एक्ट के तहत 32 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। जुर्माना जमा नहीं करने की सूरत में 37 दिन का साधारण कारावास भुगतने का आदेश दिया गया। नामिक अधिवक्ता ने बताया कि नाबालिग के पिता ने जुर्माने की राशि जमा करने के साथ ही अदालत उठने तक कोर्ट में खड़ा रहने की सजा भुगत ली है।
क्या करें अभिभावक
-किसी भी प्रकार की आफत से बचने के लिए नाबालिग के हाथों में बाइक या स्कूटी न दें।
-बच्चों को समझाया जाए कि उनकी जिद और शौक बड़ी मुसीबत में डाल सकता है
-18 साल की उम्र के बाद बिना किसी डर के दो पहिया वाहन चला सकते हैं
(जैसा सुरेंद्र कुमार एआरटीओ ने कहा)