बनबसा (चंपावत)। कभी भाप की ताकत से अपने पहियों पर घूमने वाला छोटा मैरी भाप का इंजन वर्तमान में एक ऐतिहासिक धरोहर के रूप में शारदा बैराज पर खड़ा है। इस इंजन ने शारदा बैराज निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया था। बैराज निर्माण के बाद भी इस इंजन से अधिकारी और कर्मचारी वर्षों रेलवे स्टेशन तक आवाजाही भी करते थे।
शताब्दी वर्ष 2000 में इस इंजन को स्टोर से निकाल कर बैराज के पास खड़ा करा दिया गया। उत्तर प्रदेश में कृषि भूमि की सिंचाई को अंग्रेज हुक्मरानों ने वर्ष 1928 में शारदा बैराज का निर्माण कराया था। बैराज निर्माण में बड़ी मशीनों, निर्माण और अन्य सामग्रियों को ढोने में मैरी भाप इंजन ने खास भूमिका निभाई थी।
दो फुट चौड़ी पटरियों पर दौड़ने वाले मैरी इंजन को बैराज निर्माण के समय इंग्लैंड से मंगाया गया था। इंग्लैंड की डब्लूजी बेगनल लिमिटेड स्टेफोर्ड कंपनी से खास तौर पर शारदा बैराज के लिए इस छोटे इंजन का निर्माण किया था। सामान ढोने के लिए इंजन के साथ करीब 60 खुले डिब्बे भी बनवाए गए थे। इस इंजन की पानी क्षमता 240 एलबीएस की है, जिसे 160 एलएसई भाप की ताकत दौड़ाती थी।
एसडीओ बीएस यादव ने बताया कि इंजन की एसेंबलिंग पश्चिम बंगाल में की गई थी। बैराज निर्माण के बाद इस इंजन को 50 के दशक तक बैराज से रेलवे स्टेशन तक आने-जाने के लिए प्रयोग में लाया जाता था। अब यह इंजन पर्यटकों और बच्चों के लिए आकर्षण के केंद्र बना हुआ है। इस ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा को शेड की जरूरत है।