चंपावत। विकास से अछूते अनुसूचित जाति (एससी) बहुल गांवों को अब समाज कल्याण विभाग संवारेगा। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) के तहत इन गांवों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराईं जाएंगी। प्रदेश में चयनित कुल 191 गांवों में से चंपावत जिले के पांच गांव इस योजना में शुमार हैं। इसके लिए भारत सरकार से 50 प्रतिशत राशि (कुल 50 लाख -प्रत्येक गांव के लिए 10 लाख रुपये) मिल चुकी है। निर्धारित सुविधाएं दिए जाने के बाद इन गावों को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम घोषित किया जाएगा।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत एससी बहुल गांवों को विकास से जोड़ने के लिए शुरू की गई इस योजना में 50 प्रतिशत से अधिक एससी आबादी वाले गांव शामिल किए गए हैं। साथ ही 2011 की जनगणना के आधार पर ऐसे गांवों की कुल आबादी 500 या उससे अधिक होनी चाहिए।
हर गांव के 20-20 लाख देगी सरकार
योजना में चयनित हर गांव को भारत सरकार 20-20 लाख रुपये देगी। चंपावत जिले में बाराकोट ब्लॉक को छोड़ शेष तीन ब्लाकों के पांच गांवों का चयन किया गया है। बुनियादी विकास के जरिये इन गांवों के वित्तीय समावेशन के लिए कार्ययोजना तैयार कर दी गई है। समाज कल्याण विभाग ने आवश्यकतापरक मूल्यांकन कर अवसंरचना विकास के लिए ग्राम स्तरीय सर्वेक्षण कर वेब पोर्टल पर अंतरिम वीडीपी (ग्राम्य विकास योजना) जनरेट कर दिया है। जिला स्तरीय समिति के अनुमोदन के बाद पांचों चयनित गांव को दस-दस लाख रुपये दिए जाएंगे।
शामिल किए गए गांव और एससी आबादी का प्रतिशत
1.चंपावत ब्लॉक: नरसिंह डांडा (100), फागपुर (68.50)।
2.पाटी ब्लॉक: मौनकांडा (61.40)।
3.लोहाघाट ब्लाक: बिंडा तिवारी (51.80), मडुवा (50.30)।
ये दस सुविधाएं मिलेंगी
पेयजल-स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य-पोषण, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण सड़कें-आवास, बिजली-स्वच्छ ईंधन, कृषि पद्धतियां, वित्तीय अंतर्वेशन, डिजिटलीकरण और जीवनयापन-कौशल विकास।
कोट
पीएमएजीवाई के तहत चयनित पांचों गांवों के लिए भारत सरकार ने 50 लाख रुपये दिए हैं। इस राशि का उपयोग गांवों के विकास और बुनियादी जरूरतों के लिए किया जाएगा। जिला स्तरीय अभिसरण समिति की बैठक कर अंतरिम वीडीपी अनुमोदित करा चिन्हित कार्यों की पूर्ति के लिए धन अवमुक्त किया जाएगा। -आरएस सामंत, जिला समाज कल्याण अधिकारी, चंपावत।
कृषि और शिक्षा विभाग भी कर रहा आदर्श पहल
चंपावत। समाज कल्याण विभाग से पूर्व कृषि और शिक्षा विभाग के जरिये भी कई गांवों और स्कूलों को आदर्श बनाने की कवायद की गई है। कृषि विभाग इन चार ग्राम समूहों को नगदी फसल वाली खेती, बागवानी, दूध आदि का उत्पादन कर आय बढ़ाएगा। वहीं शिक्षा विभाग ने जिले में आठ स्कूलों को आदर्श दर्जा देकर अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई, स्मार्ट कक्षाएं, पर्याप्त शिक्षक और स्टाफ, फर्नीचर और अन्य सभी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।