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वित्त आयोग की राशि पर शासनादेश से भड़के प्रधान

Fri, 11 Sep 2015 10:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत/टनकपुर
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केंद्र सरकार की ओर से 14वें वित्त आयोग की राशि को सीधे ग्राम पंचायतों को दिए जाने संबंधी फैसले पर राज्य सरकार की ओर से अड़ंगा लगाने पर ग्राम प्रधान भड़क गए हैं। शुक्रवार को ग्राम प्रधानों ने राज्य सरकार की ओर से वित्त आयोग की राशि को मुख्यमंत्री के विवेक से खर्च किए जाने संबंधी शासनादेश का विरोध किया। उन्होंने डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर शासनादेश को तत्काल वापस लेने की मांग की। वहीं, टनकपुर में ग्राम प्रधानों ने राज्य सरकार पर ग्राम पंचायतों के विकास में अड़ंगा लगाने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
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प्रधानों ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से पंचायतों के अधिकार हनन करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि शासनादेश को वापस नहीं लिया गया तो ग्राम प्रधान संगठन प्रदेश व्यापी आंदोलन शुरू करने के साथ ही आगामी चुनाव में राज्य सरकार का पुरजोर विरोध करेगा। प्रदर्शन और ज्ञापन देने वालों में सुरेंद्र नाथ, ममता बिष्ट, डूंगर सिंह, देवेंद्र सिंह मेहरा, महेश सिंह, संजय सिंह, विनोद सिंह, प्रकाश चंद्र, केशव दत्त मौनी, शांति देवी आदि थे।

उधर, ग्राम प्रधान संगठन के बैनर तले तहसील पहुंचे टनकपुर-बनबसा और सूखीढांग क्षेत्र के ग्राम प्रधानों ने प्रभारी तहसीलदार ख्याली राम को प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि राज्य सरकार ने अब तक विकास कार्यों के लिए पंचायतों को किसी तरह का मद आवंटित नहीं किया है और राज्य में पंचायत एक्ट नहीं बनने से भी पंचायतों के अधिकारों का हनन हो रहा है। ज्ञापन देने वालों में संगठन के अध्यक्ष अमजद हुसैन, उपाध्यक्ष किरन देवी, अरूण कुमार, पूजा देवी, बसंत राय, सतीश पांडेय, दीपा बिष्ट, सुनीता शाही, नीतू गोस्वामी, कमलेश देवी, गंगा गुरूंग, गिरधारी लाल, कलावती देवी आदि शामिल थे।
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विकासखंड में व्याप्त अनियमितताओं को दूर करें
चंपावत। ग्राम प्रधान संगठन की ओर से खंड विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर चंपावत विकासखंड में व्याप्त अनियमितताओं को दूर करने की मांग की है। कहा कि मनरेगा एक्ट में क्षेत्र और जिला पंचायत को बिना खुली बैठक के तीन से चार लाख रुपये की योजनाओं के कार्य कराने का अधिकार मिला है, जबकि ग्राम पंचायतों को एक लाख रुपये तक के ही कार्यों की जिम्मेदारी दी जा रही है। ज्ञापन में मनरेगा के तहत तीन लाख तक के कार्ययोजना की स्वीकृति का अधिकार ग्राम पंचायतों को देने की मांग की है।
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