सीएम हरीश रावत सूबे के लोगों का रुझान खेतों की ओर कर गांवों से पलायन रोकने के भले ही जितने दावे करें, लेकिन सरकारी मशीनरी इसके लिए तैयार नहीं दिखती। हाल ही में किसानों को माल्टा तथा नींबू वर्गीय फलों की 20 रुपये प्रति किलो की दर से कीमतें मिलने की घोषणा फलोत्पादकों के लिए सपना साबित हो रही है।
शासन ने उद्यान विभाग को नींबू प्रजाति के फलों की खरीद कर किसानों को उसका वाजिब मूल्य दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन सरकारी खरीद केंद्रों के समय से न खुलने तथा इसकी जानकारी न होने के कारण यहां के काश्तकार माल्टा पांच से आठ रुपये प्रति किलो की दर से बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
निजी तौर पर अभी तक यहां से 50 से अधिक ट्रक माल्टा मैदानी क्षेत्रों की ओर जा चुका है। सवाल यह उठता है कि किसानों को फायदा दिलाने में आखिर चूक किस स्तर पर हुई है। इसके लिए उत्तरदायी कौन है। विभाग की कार्यप्रणाली इसी से जाहिर है कि अब तक जिले में सरकारी केंद्रों से मात्र आठ क्विंटल माल्टा की खरीद की गई है।