5040 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा बांध से
60 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना में बीते एक दशक से ठहराव की स्थिति है। पंचेश्वर और इसके रेगुलेटिंग बांध रूपालीगाड़ से 5040 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। पंचेश्वर से 4800 और रूपालीगाड़ से 240 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। पंचेश्वर के अलावा रूपालीगाड़ में बनने वाले रेगुलेटिंग बांध निर्माण के लिए भूमिगत सुरंगों का काम पहले ही पूरा हो चुका है।
विस्थापन की नहीं बनी योजना : प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में 3.40 लाख से अधिक पेड़ आएंगे। जिनकी गिनती का कार्य वन विभाग ने पूरा कर लिया है। परियोजना से तीन जिलों की 134 ग्राम पंचायतों (पिथौरागढ़ के 87, चंपावत के 26 और अल्मोड़ा जिले के 21 गांव) के 54488 लोग विस्थापित होंगे। जिनके कोई भी कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी है।
बांध के अनुकूल पाई गई है पहाड़ों की क्षमता
पंचेश्वर बांध निर्माण की डीपीआर तैयार कर रही वापकोस कंपनी की ओर से किए गए सर्वेक्षणों के अनुसार यहां के पहाड़ों की क्षमता बांध के लिए अनुकूल पाई गई है। 315 मीटर ऊंचे प्रस्तावित बांध से 25 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र जलमग्न होगा। इसके दायरे में झूलाघाट बाजार के अलावा घाट, पनार, सरयू नदी तट पर बने पुल तथा बस्तियां जलमग्न हो जाएंगी। रॉकफिल डिजाइन से बनने वाले बांध की डीपीआर तैयार करने के साथ यहां भूकंपीय दृष्टि से भी सर्वेक्षण उपयुक्त पाया गया है।
पंचेश्वर बांध परियोजना को लेकर लोगों की उम्मीदें खत्म होती जा रही है। एक दशक में बांध निर्माण की दिशा में कुछ भी नहीं हुआ। -गुमान प्रथोली, ग्रामीण।
पंचेश्वर में परियोजना के निर्माण से क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में बढ़ोत्तरी होती और विकास के नए युग का आगाज होता। -नंदाबल्लभ बगौली, ग्रामीण।
केंद्र सरकार को अपने चुनावी मैनीफेस्टों में स्पष्ट करना चाहिए कि बांध परियोजना का निर्माण होगा या नहीं होगा। -ओंकार सिंह धौनी, ग्रामीण।
परियोजना के प्रस्तावित होने के कारण क्षेत्र में किसी भी प्रकार के बड़े विकास और निर्माण कार्य नहीं हो पा रहे हैं। -शंकर दत्त पांडे, ग्रामीण।