चंपावत। जिला मुख्यालय में एसपी है, सीओ है, लेकिन यहां न तो अग्निशमन अधिकारी तैनात है और न ही फायर यूनिट है। जिस कारण चंपावत मुख्यालय में आग की वारदात होने की दशा में 15 किमी दूर लोहाघाट के अग्निशमन केंद्र का आसरा है। इस फासले को लांघने में अग्निशमन कर्मियों को 20 मिनट से अधिक का समय लगता है।
चंपावत के अलावा पाटी और बाराकोट तहसील में भी आग से बचाव का कोई इंतजामात नहींं हैं। ऐसे ही हाल पहाड़ की दो तहसीलों सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों के हैं। बाराकोट से 15 किमी, पाटी से 30 किमी, रीठासाहिब से 62 किमी दूर भी किसी भी तरह की अग्नि दुर्घटना होने पर लोहाघाट का अग्निशमम दस्ता मददगार बनता है। जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर में दूसरा अग्निशमन केंद्र है। चंपावत मुख्यालय में अग्निशमन केंद्र का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय और शासन के बीच झूल रहा है। 15 सितंबर 1997 में बने चंपावत जिले के मुख्यालय में अग्निशमन प्रबंधन के हाल खासे खराब हैं। जिले में पहाड़ में लोहाघाट और मैदानी क्षेत्र टनकपुर में ही अग्निशमन केंद्र है।
पहाड़ की ये तीनों तहसील पूरी तरह से लोहाघाट पर आश्रित है। एसपी देवेंद्र पींचा का कहना है कि चंपावत मुख्यालय के लिए अग्निशमन केंद्र के प्रस्ताव को पूर्व में ही स्वीकृत मिल चुकी है। जिसके बाद विभाग की ओर से जमीन का चयन भी कर लिया गया है। अग्निशमन केंद्र के निर्माण के लिए बजट की मंजूरी हो लेकर पुलिस मुख्यालय और शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। संवाद
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कोट
चंपावत जिला मुख्यालय में जल्द ही अग्निशमन केंद्र का निर्माण शुरू करने के साथ ही अग्निशमन कर्मियों के लिए आवासों का निर्माण भी किया जाएगा। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है।
देवेंद्र पींचा, एसपी, चंपावत।
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चंपावत में इस वर्ष दावाग्नि काल में हुई 19 घटनाएं
चंपावत। डीएफओ आरसी कांडपाल ने बताया कि 18 फरवरी से 15 जून तक चले दावाग्नि काल में 19 घटनाएं हुई हैं। जिसमें 11.10 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। जबकि 2022 में आग की 80 घटनाओं में 52.25 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा था। संवाद