जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधारने के लिए जिलाधिकारी के निरीक्षण से लेकर कई कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन अस्पताल की तस्वीर में चमक नहीं आ पा रही है। अस्पताल में खामियां खूब हैं। यहां तक कि अस्पताल का एक गेट तो कभी खुलता नहीं है। इस बंद गेट के भीतर विशालकाय जनरेटर रखा हुआ है।
जिला अस्पताल में दाखिल होने के तीन गेट हैं। वाह्य चिकित्सा कक्ष (ओपीडी) के लिए एक और आपात कक्षों के लिए दो गेट हैं, मगर आपात कक्ष को जाने वाला दूसरे नंबर का गेट बंद है। इसी बंद गेट के भीतरी हिस्से में जनरेटर रखा गया है। साइलेंसर की वजह से जनरेटर से आवाज तो कम होती है, लेकिन ईंधन की दुर्गंध जरूर आती है। वहीं जनरेटर रखे जाने से तीसरे गेट से आवाजाही भी नहीं होती है।
जिला अस्पताल में गर्मियों के इस सीजन में पानी की जबर्दस्त किल्लत रहती है। नलों में लंबे समय से पानी नहीं आ रहा है और इसका असर अस्पताल आने वाले मरीजों पर भी पड़ता है। पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। पानी की कमी से जिला अस्पताल का आरओ सिस्टम भी प्रभावित हो रहा है। सबसे बुरा असर अस्पताल की साफ-सफाई पर पड़ा है। इमरजेंसी के महिला और पुरुष दोनों तरह के शौचालयों पर ताले लटके हैं।
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जिला अस्पताल के तीसरे गेट में काफी वक्त से जनरेटर रखा गया है। यहां जनरेटर रखने की वजह इसकी सुरक्षा और इस गेट का कम उपयोग होना है। इस गेट के बंद होने से अस्पताल के कामकाज पर असर नहीं पड़ रहा है। गेट के बाहरी हिस्से पर पार्किंग बना दी गई है। पेयजल की कमी को दूर करने के लिए जल संस्थान से नियमित रूप से टैंकर के जरिए तीन हजार लीटर की मांग की गई है। पानी की कमी से शौचालयों को बंद किया गया है। इन्हें मरीजों के उपयोग के वक्त खोला जाता है। -डा.आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल, चंपावत।