पीपीपी से नवंबर 2016 में दुबारा सरकारी स्वामित्व में आए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहाघाट में शुक्रवार को लोगों को न एक्सरे की सुविधा मिली और न ही अल्ट्रासाउंड की। दोनों कक्षों में ताले लटके होने से मरीजों को मायूस होेकर लौटना पड़ा। यहां तैनात आठ डाक्टरों में से सीएमएस डॉ.वीके जोशी, सर्जन डॉ.प्रभा जोशी, डॉ.जितेंद्र जोशी, डॉ.कीर्ति मेहता और दंत रोग विशेषज्ञ डॉ.शालिनी तैनात मिले।
सीएमएस डॉ. जोशी ने बताया कि तीन डॉक्टर विभागीय कार्य से दूसरी जगह गए हुए हैं। इनमें डॉ.मंजीत सिंह चंपावत, डॉ.सोनाली मंडल अदालती काम से ऊधमसिंह नगर और रेडियोलॉजिस्ट डॉ.एलएम रखोलिया हल्द्वानी गए हुए है। आम तौर पर यहां अल्ट्रासाउंड की बेहतरीन व्यवस्था है, मगर रेडियोलॉजिस्ट के बाहर होने से आज अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटका हुआ था। एक्सरे करने वाले भी अस्पताल से बाहर होने के कारण मरीजों के एक्सरे भी नहीं हो पाए। शुक्रवार को अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों ने 347 मरीजों का उपचार किया। वर्तमान में यहां 13 मरीज भर्ती हैं। अलबत्ता भर्ती मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था ठीक है। सामान्य बीमारियों की दवाएं अस्पताल से मिल जाती है। लोहाघाट अस्पताल में जिले के पहले जन औषधि केंद्र खुलने से बेहद कम कीमत पर जेनरिक दवाएं लोगों को मिल रही है।
जिला अस्पताल के लिए बेहद जरूरी हैं तीन विशेषज्ञ डॉक्टर
चंपावत। प्रयासों के बावजूद जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल की हालत में सुधार नहीं हो पा रहा है। इस वक्त यहां 26 डॉक्टरों में से 14 पद खाली हैं। इनमें नौ विशेषज्ञ डाक्टरों के पद शामिल हैं। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी का कहना है कि फिजीशियन, निश्चेतक व बाल रोग विशेषज्ञ के पदों को भरे बगैर ऑपरेशन सहित कई जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। वैसे अस्पताल में थॉयराइड जांच को छोड़ अधिकांश पैथोलोजी जांच हो रही है।