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पहले लटके ताले, अब शिफ्ट हुआ सामान

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बाराकोट में किराये के इस भवन में चलता था आईटीआई, अब इसका सामान चंपावत भेज दिया गया है। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार देने के मकसद से मंजूर बाराकोट के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) अब अतीत का हिस्सा बनता दिख रहा है। दो साल से बंद इस संस्थान के स्टाफ को दूसरी जगह समायोजित करने के बाद यहां के फर्नीचर व ट्रेड का सामान चंपावत भेज दिया गया है।
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वैसे मौजूदा जरूरत के अनुरूप ट्रेड न होने और जरूरी संसाधनों की कमी से यहां पहले भी छात्र संख्या लगातार कम हो रहे थे। अनुदेशक न होने से सिलाई कटिंग का ट्रेड पहले ही बंद हो चुका था। राज्य सहकारिता परिषद के उपाध्यक्ष हयात सिंह माहरा के गृहक्षेत्र वाले इस आईटीआई का साइनबोर्ड भी हटा दिया है।
2018 से बंद होने से पहले यहां की छात्र संख्या 18 से घटकर 11 तक पहुंच गई थी। उस वक्त यहां स्वीकृत तीन ट्रेडों में से दो (इलेक्ट्रिशियन और कंप्यूटर ऑफ प्रोग्रामिंग एप्लीकेशन) ही चल रहे थे। स्टाफ, जगह व संसाधनों की कमी के बावजूद ये संस्थान संचालित हो रहा था। आईटीआई के प्रभारी आरके जोशी ने बताया कि किराये में चलने वाले संस्थानों को बंद करने के आदेश से यहां के सामान को भी चंपावत शिफ्ट कर दिया गया है। बताते चलें कि बाराकोट के लोग आईटीआई के भवन के लिए चामड़किनी तोक में वर्षों पूर्व 20 नाली जमीन दान कर चुके हैं। लेकिन बजट नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो सका है।
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सीएम ने किया था आदर्श आईटीआई का एलान
बंद हो चुके बाराकोट के आईटीआई को आदर्श आईटीआई का दर्जा देने का 2018 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एलान किया था। तब आईटीआई प्रशासन ने सीएम के एलान का उल्लेख करते हुए यहां फीटर, मोटर मैकेनिक, मशीनिस्ट और कटिंग टेलरिंग के ट्रेडों के साथ अन्य जरूरी सुविधाओं का प्रस्ताव नोडल कार्यालय टनकपुर आईटीआई भेजा गया। उस प्रस्ताव पर तो कुछ नहीं हुआ, लेकिन यह संस्थान बंद हो गया।
इन संस्थानों में शिफ्ट किए गए कर्मी
बाराकोट के स्टाफ को अलग-अलग आईटीआई में शिफ्ट कर दिया गया है। एक अनुदेशक व एक कनिष्ठ सहायक को खेतीखान, फोरमैन व कार्यशाला अटैंडेंट टनकपुर और अनुदेशक व सहायक स्टोर कीपर को चंपावत शिफ्ट कर दिया गया है।
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