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रीठा साहिब अस्पताल में दिनभर लटका रहा ताला

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रीठा साहिब अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लटका ताला। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। जिले के दूरस्थ लधिया घाटी क्षेत्र के रीठा साहिब अस्पताल में सोमवार को दिन भर ताला लटका रहा। डॉक्टर विहीन इस अस्पताल का पूरा दारोमदारफार्मासिस्ट पर था। मगर सोमवार से अवकाश में गए फार्मासिस्ट के बाद किसी भी कर्मी के नहीं आने से अस्पताल बंद रहा। अलबत्ता अस्पताल परिसर में ही बने एएनएम केंद्र की प्रभारी ने तीन मरीजों का इलाज जरूर किया।
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जिला मुख्यालय से 75 किमी दूर रीठा साहिब के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों के पीजी की पढ़ाई में जाने से इस साल मई से यह अस्पताल डॉक्टर विहीन हो गया था। इलाज से लेकर दवा वितरण की जिम्मेदारी अकेली फार्मासिस्ट दीपा कश्यप की थी। लेकिन सोमवार से अवकाश पर होने से यहां भेजे गए फार्मासिस्ट के नहीं आने से मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे देशराज, अनिल वर्मा, हयात राम समेत कई मरीज अस्पताल से बैरंग लौटे। अलबत्ता अस्पताल परिसर में बने एएनएम केंद्र के एएनएम सुमित्रा रानी ने तीन मरीजों का इलाज किया। पैरा लीगल वालंटियर हयात राम ने अस्पताल बंद होने की जानकारी जिलाधिकारी को दी। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने मामले की जांच कराने के साथ दूसरे फार्मासिस्ट को भेजने की बात कही है।
कोट
अवकाश पर गई फार्मेसिस्ट के स्थान पर मंगललेख के फार्मासिस्ट जगदीश राणा को रीठा साहिब जाने के आदेश दिए गए थे। जिलाधिकारी के आदेश के बाद अस्पताल नहीं पहुंचे फार्मासिस्ट राणा का स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
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डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ।
रीठा साहिब में एएनएम ने किया जटिल प्रसव
रीठा साहिब (चंपावत)। एक तरफ रीठा साहिब के अस्पताल में ताला लटका रहा, तो वहीं यहां के एएनएम केंद्र में एएनएम ने सोमवार को ही एक जटिल प्रसव कराया। उनके उपचार के बाद जच्चा और बच्चा दोनों खतरे से बाहर हैं।
गोलडांडा गांव की गीता देवी (35) पत्नी तारा दत्त रात में तेज दर्द होने पर सोमवार पूर्वान्ह रीठा साहिब के एएनएम केंद्र लाया गया। गर्भवती की कोई रिपोर्ट साथ नहीं होने और शिशु के फंसे होने के बावजूद एएनएम ने सूझबूझ से प्रसव कराया। इलाज के बाद मां और बेटी दोनों स्वस्थ हैं। इससे पूर्व इसी साल अगस्त में रीठा साहिब की एएनएम ने एक और जटिल प्रसव किया था। ब्यूरो
जिले में एक भी गायनाकोलॉजिस्ट नहीं
चंपावत। जिले के एक भी सरकारी अस्पताल में इस वक्त महिला संबंधी रोगों के इलाज की रत्तीभर व्यवस्था नहीं है। 23 अस्पतालों में से किसी में भी गायनाकोलॉजिस्ट नहीं है। इसके चलते प्रसव के जटिल मामलों को अमूमन पिथौरागढ़ महिला अस्पताल या हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर करना पड़ रहा है। ब्यूरो
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