जिले के नगरीय और आसपास के इलाकों में खड़ी होली का गायन चरम पर पहुंच गया है। होल्यारों की टोलियां घर घर जाकर ढोल और झांझर की थाप पर विभिन्न प्रकार की होलियों का गायन कर रही हैं। जबकि कुछ स्थानों में निर्धारित स्थल और मंदिरों में खड़ी होली का गायन किया जा रहा है।
होल्यारों की टोलियां चलो कहो तो यहीं रम जाएं गोरी नैना तुम्हारे रसा भरे, ओ तेरे नैन रसीले यार, बालम प्रीत लगा ले नैनों से, सुमिरो सीता राम भया कोई हीरा जनम नहीं पाओगे, ओ मोहन नंदलाल बरसाने वन आए, तेरी तपस्या होय कुंवर भागीरथ गंगा ले आए, जै बोलो जशोदा नंदन की, नदी यमुना के तीर कदम चढ़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया, ऐसी चातुर नार श्रवण मारो छ, तल धरती पुर बादल, बादल उपजी बयार आदि बोलों के साथ एक घर के आंगन से दूसरे घर के आंगन में जा रही हैं। जिला मुख्यालय के अलावा त्यारकूड़ा, तल्ली मादली, छतार, कुलेठी, डड़ा, ढकना बडोला, चक्कू, डूंगरासेठी, देवलनाद, खर्ककार्की, पवेत, बाजरीकोट, सिमल्टा, मुडियानी, फुलारागांव, शक्तिपुर बुंगा, कनलगांव के अलावा सिप्टी, सैंदर्क, अमकडिय़ा, ओखलढूंगा, बूढाखेत, पाली, घुरचुम, अमोड़ी, बडोली, सूखीढांग आदि क्षेत्रों में भी होली गायन चरम पर पहुंच गया है।
शराब की दुकानों में लगी भारी भीड़
चंपावत। होली पर्व के कारण दो मार्च को अवकाश होने के चलते बृहस्पतिवार को शराब की दुकानों में काफी भीड़ उमड़ी। एक ओर अधिकांश दुकानदारों के होली का त्यौहार मनाने के लिए अपने घरों को निकलने के कारण जहां दुपहर बाद बाजार में सन्नाटा पसर गया। वहीं शराब की दुकानों में खासी भीड़ उमड़ी। इस बीच शराब की दुकानों में शराब सस्ती किए जाने के कारण भी लोगों की खूब भीड़ उमड़ी।
मौसम का रोड़ा खुलकर नहीं खेलने दे रहा है होली
चंपावत। फागुन में होली की मस्ती में डूबे होल्यारों के आनंद में मौसम की मार अवरोध पैदा कर रही है। बीते दो दिनों से मौसम के करवट बदल लेने और आसमान में बादल छाने के कारण तापमान में गिरावट आने से ठंड में इजाफा हो रहा है।