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योजना पूरी फिर भी लोग बे-पानी, बस पांच माह से परीक्षण ही चल रहा

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चंपावत। चंपावत क्षेत्र की क्वैराला पंपिंग योजना का काम पांच महीने पहले पूरा हो चुका है लेकिन पानी तो नहीं मिला। योजना में देरी और पंप के ठीक से काम न करने की जांच शुरू हुई और यह जांच पूरी हो गई लेकिन यह योजना लोगों को पानी नहीं दे पा रही है। पांच महीने बाद भी योजना के शुरू न होने की वजह योजना का पानी उपयोग लायक नहीं होना है। ट्रायल में सफल होने के बावजूद पेयजल की शुद्धता की कमी इसके आड़े आ रही है।
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चंपावत शहर के लिए अगस्त 2016 से चंपावत पुनर्गठन पेयजल योजना (क्वैराला पंपिंग योजना) का काम शुरू होकर इस साल मार्च में पूरा हुआ। तीस करोड़ अठासी लाख रुपये से बनी 17 किमी लंबी इस योजना से 30 वर्षों तक 29,000 लोगों की पानी की जरूरत पूरी होनी है लेकिन इस योजना से पानी अब भी नहीं मिल पा रहा है। ट्रायल पूरा करने के बाद पानी की टेस्टिंग की गई लेकिन पांच बार परीक्षण करने के बाद भी पानी शुद्धता की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका है। इस योजना का लोगों को पानी कब मिल सकेगा, यह अभी तय नहीं है।
शुद्धता के लिए चाहिए छह पीएच का पानी
चंपावत। शुद्ध और पीने योग्य जल छह पोटेंशियल ऑफ हाइड्रोजन (पीएच) होना चाहिए। क्वैराला पंपिंग योजना का पानी का पीएच 11 है। जल निगम के ईई वीके पाल का कहना है कि इसका नियमित परीक्षण कराया जा रहा है। शुद्धता के निर्धारित मानक पर खरा उतरने के बाद पानी की आपूर्ति की जाएगी।
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वहीं जिले में एक सौ अठहत्तर लाख लीटर पानी रोजाना चाहिए लेकिन इसके सापेक्ष सिर्फ चौरासी लाख लीटर पानी ही मिल रहा है। चंपावत शहरी क्षेत्र की 16,000 की आबादी को रोजाना तेईस लाख साठ हजार लीटर पेयजल के सापेक्ष सिर्फ ग्यारह लाख (48.72 प्रतिशत) लीटर पानी ही मिल रहा है। छीड़ापानी, ललुवापानी, रौखेत, च्यूराखर्क, चौड़देव, दियारखोला, सैदाखोला, थूम, थैण, दुगधारी, सिमाल स्रोतों से पेयजल आपूर्ति हो रही है।
क्वैराला पंपिंग योजना से अभी पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसकी वजह पेयजल का मानकों के अनुरूप शुद्ध न होना है। पानी की शुद्धता का हर सप्ताह परीक्षण कराया जा रहा है। परीक्षण में लगातार सुधार है। उम्मीद है कि सितंबर में आपूर्ति शुरू हो जाएगी। - वीके पाल, ईई, जल निगम, चंपावत।
3 साल में 2 योजनाओं का एलान, काम एक में भी शुरू नहीं
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। मां पूर्णागिरि धाम क्षेत्र के पर्यटन विकास और लोगों को सुविधाओं के विस्तार के दावे खूब हो रहे हैं। इसके लिए समग्र योजना भी तैयार की जा रही है। वहीं इस धाम के लिए घोषित दो पेयजल योजनाओं में से काम एक पर भी शुरू नहीं हो सका है और पानी की किल्लत न केवल श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ा रही है बल्कि क्षेत्र के लोगों की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।
अक्तूबर 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश के सबसे बड़े आध्यात्मिक स्थलों में से एक पूर्णागिरि धाम में पेयजल योजना के निर्माण का एलान किया था लेकिन इस योजना में काम शुरू नहीं हो सका है। तीन करोड़ पिचानबे लाख रुपये की पहली योजना का काम शुरू भी नहीं हुआ कि सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस साल दो अप्रैल को लादीगाड़ से पेयजल योजना के निर्माण का एलान कर दिया। पहली (मां पूर्णागिरि धाम गुरुत्व पेयजल) योजना का काम शुरू होने के दो साल बाद पूरा हो सकेगा। वहीं जल निगम के ईई वीके पाल का कहना है कि योजना की निविदा पूरी हो चुकी है। जल्द ही ठेकेदार के साथ अनुबंध कर बरसात बाद काम शुरू कराया जाएगा।
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