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जंगल किनारे तारबाड़ में लगाए फंदे में फंसा तेंदुआ,

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तेंदुआ देखने को छीनीगोठ में उमड़ी भीड़। - फोटो : TANAKPUR
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टनकपुर (चंपावत)। खटीमा रेंज में जंगल से लगे छीनीगोठ में तारबाड़ में लगाए गए फंदे में एक तेंदुआ फंस गया। हल्द्वानी से वन विभाग की टीम के आने के बाद फंदे में फंसे तेंदुए को ट्रेंक्यूलाइज कर निकाला गया। फंदा लगाने के शक में घटना स्थल के पास बटाई में खेती करने वाले शाहजहांपुर के एक युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। उप प्रभागीय वनाधिकारी बाबू लाल ने बताया कि युवक से फंदों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
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तराई पूर्वी वन प्रभाग के खटीमा रेंज के जंगल से लगे छीनीगोठ में रविवार सुबह गांव के लोगों को तारबाड़ में लगाए गए फंदे में तेंदुआ फंसा दिखा। सूचना पर तराई पूर्वी वन प्रभाग के उप प्रभागीय अधिकारी बाबू लाल, खटीमा रेंजर राजेंद्र सिंह मनराल और शारदा रेंजर महेश सिंह बिष्ट के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पहले तो तेंदुए के तारबाड़ और गिरे हुए पेड़ के एक तने मेें फंसे होने का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन नजदीक जाकर देखा तो वह तार से बनाए गए फंदे में फंसा था। हल्द्वानी से आए डॉ. आयुष द्वारा तैयार की गई बेहोशी की डोज से ट्रेंक्यूलाइज कर तेंदुए को फंदे से निकाला गया।
उप प्रभागीय वनाधिकारी बाबू लाल ने बताया कि फंदे में फंसने से तेंदुए का एक पैर में जख्मी हुआ है। चिकित्सकों की टीम की निगरानी में तेंदुए को रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है।
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15 घंटे से अधिक समय तक फंदे में फंसा रहा तेंदुआ
अनुमान लगाया जा रहा है कि तेंदुआ करीब 15 घंटे तक फंदे में फंसा रहा होगा। ग्रामीणों के अनुसार शनिवार रात साढ़े नौ बजे से तेंदुए की दहाड़ सुनाई दे रही थी। ग्रामीणों को इसके फंसे होने के बारे में रविवार सुबह सात बजे पता चला। इसके बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन क्षेत्राधिकारी महेश सिंह बिष्ट ने बताया कि तेंदुए को करीब साढ़े 11 बजे फंदे से निकाला गया।
घटनास्थल से थोड़ी दूर एक और फंदा मिला
जहां पर तेंदुआ फंदे में फंसा था वहां से दस फुट दूर एक और फंदा मिला है। वन विभाग ने इसे कब्जे में लेकर छानबीन शुरू कर दी है। वन क्षेत्राधिकारी राजेंद्र मनराल का कहना है कि घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक और फंदा मिलने से साफ है कि क्लच तार से बनाए गए ये फंदे किसी ने वन्यजीवों के शिकार के लिए लगाए थे। उन्होंने बताया कि मामले की जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
वन्यजीवों की सुरक्षा पर खड़े हुए सवाल
टनकपुर। तेंदुए के फंदे में फंसने की इस ताजा घटना ने वन्यजीवों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना से साफ है कि जंगल और गांवों की सीमाओं में फंदा लगाकर वन्यजीवों का धड़ल्ले से शिकार किया जा रहा है। फंदे में तेंदुए के फंसने की क्षेत्र में यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी चार ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी है। फंदे में फंसने से तीन तेंदुओं की मौत हो गई थी, और एक बारसिंघा को रेस्क्यू कर बचा लिया गया था। करीब सात साल पूर्व स्ट्रांग फार्म बनबसा के पीछे जंगल में लगे फंदे में फंसकर तेंदुए की मौत हुई थी। वर्ष 2014 में बनबसा सैनिक छावनी की फायरिंग रेंज के पीछे भी फंदे में फंसकर एक तेंदुआ मरा था। वर्ष 2014 में ही ककरालीगेट-आमबाग मार्ग पर भी तारबाड़ में लगाए गए फंदे में फंसकर एक तेंदुए की मौत हो चुकी है। (संवाद)

रेस्क्यू कर पिंजरे में कैद किया गया तेंदुआ।- फोटो : TANAKPUR

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