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23 माह, 2 जांच अधिकारी और नतीजा...

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चंपावत। भ्रष्टाचार और विवादों के चलते अक्सर चर्चा में रहे चंपावत वन विभाग ने 23 माह पुरानी एक जांच को आखिरकार पूरा कर लिया है। दो जांच अधिकारी, जांच की सुस्त चाल और उसके बाद आई जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। देवीधुरा रेंज से आठ अगस्त 2018 को 240 टिन अवैध लीसा की बरामदगी का मामले में दोनों ट्रकों के मालिकों को निर्दोष पाया गया है जबकि ड्राइवरों को लीसा तस्करी में दोषी बताया गया है। इस जांच रिपोर्ट को डीएफओ कार्यालय को भेजा जा रहा है।
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पुलिस के सहयोग से वन विभाग की टीम ने आठ अगस्त 2018 को अल्मोड़ा जिले की सीमा से लगे चंपावत जिले के वालिग गांव के पास से दो पिकप जीप से 240 टिन अवैध लीसा बरामद किया था। बरामद अवैध लीसा कई लाख रुपयों का था। शहरफाटक के बालम सिंह और पहाड़पानी के उमेश चंद्र की दो पिकप जीपों से बरामद इस लीसे को दोनों आरोपियों सहित वन विभाग के सुपुर्द कर दिया था।
पहले जांच अधिकारी काली कुमाऊं के रेंजर हेम चंद्र गहतोड़ी से जांच दिसंबर 2018 में लोहाघाट के रेंजर को दे दी गई थी। रेंजर दीप जोशी ने अब ये जांच पूरी कर ली है। जांच रिपोर्ट में लीसे का उठान विभागीय अनुमति के बिना नाप भूमि से होने की पुष्टि हुई है लेकिन ये लीसा किस नाप भूमि का है, इसका खुलासा नहीं हो सका। बताया गया कि दोनों ड्राइवरों ने अपना अपराध कबूला है, जबकि मालिकों ने कहा कि लीसा उनकी जानकारी के बगैर जीपों से ढोया गया। जांच अधिकारी ने बताया कि दबोचे गए लीसे को डिपो से नीलाम किया जाएगा। आरोपी चालकों पर विभागीय स्तर पर दंड निर्धारित किया जाएगा।
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