बिजली की खपत कम कर उसे बचाने एवं प्रत्येक परिवार में वित्तीय बोझ कम करने में एलईडी बल्बों का प्रयोग बेहद कारगर साबित हुआ है। चंपावत जिले में जहां लोग पहले दीपावली पर्व पर बिजली की आंखमिचौली और घंटों बिजली गुल रहने से परेशान रहा करते थे। अब इससे आम लोगों को काफी राहत मिली है।
एलईडी बल्बों को सरकारी तौर पर 2017 से प्रोत्साहित किया जाना शुरू हुआ, तब इस जिले में 50 हजार बिजली उपभोक्ता थे। सितंबर 2017 में जिले की बिजली की खपत 7.4 मिलियन यूनिट (एमयू) थी। 2018 में पांच हजार उपभोक्ताओं के बढ़ने के बाद बिजली की खपत 1 मिलियन यूनिट कम होने के बाद 6.4 मिलियन यूनिट हो गई।
इसी प्रकार सितंबर 2019 में जिले में बिजली उपभोक्ताओं की तादाद 58 हजार से अधिक होने के बावजूद बिजली की खपत अब 7.4 एमयू हुई है। इस प्रकार देखा जाए तो जिले में बिडली उपभोक्ताओं की तादाद में लगातार वृद्धि होने के बावजूद भी विद्युत भार में कमी आती जा रही है।
लगातार विद्युत व्यवस्था के सुचारु रहने से बिजली संबंधी कारोबारियों का रोजगार बढ़ा है। बिजली संबंधी कारोबार करने वाले युवा उद्यमी मनोज जोशी का कहना है कि बिजली की लगातार उपलब्धता से उन जैसे कई कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने के साथ उनकी आय भी बढ़ी है।
सोलर प्लांटों से भी हो रहा बिजली उत्पादन
लोहाघाट (चंपावत)। उपखंड अधिकारी विकास भारती का कहना है कि एलईडी बल्बों के प्रयोग से विद्युत भार कम हुआ है। जिले में 106 सोलर प्लांट लगे हुए हैं जिसमें प्रत्येक प्लांट से चार किलोवाट बिजली पैदा हो रही है।
इन प्लांटों से 0.3 एमयू बिजली का उत्पादन हो रहा है। निकट भविष्य में सोलर एनर्जी के और दोहन से विद्युत भार में कमी आएगी। उनका कहना है कि पहले जहां प्लेन 100 वाट का बल्ब एक कमरे को रोशन करता था, अब इतने ही वाट में एलईडी बल्ब पूरे घर रोशन कर रहे हैं।
निकट भविष्य में और बेहतर होगी व्यवस्था
लोहाघाट (चंपावत)। दीपावली जैसे पर्व पर जबकि विद्युत भार में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो जाती है, ऐसे हालात में लोहाघाट, पाटी, बाराकोट क्षेत्रों में इस दौरान लगातार बिजली की आपूर्ति रही। इसके पीछे विभाग द्वारा लाइनों की समय से पूर्व मरम्मत के अलावा पूरे एहतियाती कदम उठाया जाना रहा है। अनुभाग अधिकारी बीबी गहतोड़ी का कहना है कि निकट भविष्य में व्यवस्था को और बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।