लधिया और रतिया नदी के किनारे बसे रीठा साहिब में धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है। माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि कई बार रात में भी खनन किया जा रहा है। खनन वाले स्थान से रीठा साहिब का पुलिस थाना महज एक किमी दूर है। राजस्व उप निरीक्षक की चौकी भी नजदीक है। मगर पुलिस और प्रशासन खनन के इस धंधे को रोक पाने में नाकाम है।
पिछले मानसूनी सीजन में क्षेत्र में बारिश औसत से करीब दस प्रतिशत कम हुई। पर्याप्त बारिश नहीं होने से बोल्डर और रेत भी नदी में कम पहुंची। लेकिन इसके बावजूद लधिया और रतिया नदी से खनन सामग्री की चोरी पर कोई अंतर नहीं आया। नदी के सीने को चीरने का सिलसिला जारी है। बताते हैं कि कई महीनों से रेता, बजरी, रोड़ी और पत्थर की चोरी की जा रही है।
आरोप है कि रीठा साहिब, परेवा, कुलियालगांव, मछियाड़ आदि गांवों से होने वाले अवैध खनन के काम में कई रसूखदार लिप्त हैं। कुछ जगह महिलाओं से भी खनन निकासी करवाई जा रही है। नदी के किनारे एकत्र खनन सामग्री पिकप और अन्य वाहनों के जरिए आगे पहुंचाई जाती है। इस सामग्री को निर्माण कार्यों के अलावा बेचा जा रहा है। भिंगराड़ा, धूनाघाट, पाटी के अलावा चंपावत जिले की सीमा से लगे नैनीताल जिले के पदमपुर, मीडार, तल्ला अमजड़, मल्ला अमजड़, पतलोट आदि तक यहां की खनन सामग्री भेजी जा रही है।
लेकिन खनन के इस धंधे को रोकने के लिए प्रशासन सुस्त है। प्रभावशाली लोगों के इस काम में शरीक होने से ग्रामीण जुबान खोलने से हिचकते हैं। अलबत्ता कुछ लोग खनन की शिकायत गुपचुप तरीके से प्रशासन से की। अवैध खनन सामग्री का निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने से रॉयल्टी के रूप में सरकारी राजस्व को भारी चूना लग रहा है।
श्रीरीठा साहिब क्षेत्र से खनन का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। अवैध रूप से खनन होने पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अहमद इकबाल, डीएम, चंपावत।