बाराकोट के सुराकोट में दुर्गम रास्तों को पार कर माँ भगवती की डोला यात्रा को मंदिर की ओर ले जाते ग्?
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लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट में तीन दिनी लड़ीधुरा महोत्सव का देवी रथों के मंदिर परिक्रमा के बाद समापन हो गया है। सुहावने मौसम के बीच श्रद्धालुओं ने लोक देवताओं का आशीर्वाद लिया। कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष मेले में भीड़ कम थी, लेकिन श्रद्धालुओं में खासा उत्साह था।
शुक्रवार रात काकड़ और बाराकोट गांवों में देवी जागरण हुआ। इस दौरान लगी देव गद्दी में लोक देवताओं ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। शनिवार दोपहर बाद काकड़ और बाराकोट से देवी रथों ने लड़ीधुरा मंदिर की ओर प्रस्थान किया। दुर्गम खड़ी चढ़ाई पार कर काकड़ गांव से पहला देवीरथ दोपहर 2:08 बजे लड़ीधूरा मंदिर पहुंचा। इसमें मां भगवती के रूप में कल्याण सिंह अधिकारी सवार होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रहे थे। 3:31 बजे बाराकोट से दूसरा देवीरथ लंबी कठिन दूरी पार कर लड़ीधुरा मंदिर पहुंचा। देव रथ में मां भगवती के रूप में रंजीत सिंह, कालिका के रूप में प्रताप सिंह, कैलपाल के रूप में नवीन सिंह सवार थे। दोनों ही रथों के पीछे महिलाएं मां के जयकारे लगाते हुए चल रहीं थीं। देवी रथों के मंदिर की परिक्रमा करने के बाद लड़ीधुरा महोत्सव का समापन किया गया। पुलिस कर्मी शांति सुरक्षा व्यवस्था में जुटे रहे। महोत्सव समिति के अध्यक्ष नगेंद्र कुमार जोशी, जगदीश अधिकारी, राजू अधिकारी, रमेश जोशी, प्रदीप ढेक, दुर्गेश जोशी, योगेश जोशी, दीनू अधिकारी, ऋतेश वर्मा, नकुल जोशी, प्रकाश अधिकारी, राकेश अधिकारी, श्याम सिंह अधिकारी, लोकमान सिंह अधिकारी आदि ने सभी का आभार जताया।