करीब 14 हजार की आबादी वाले लधिया घाटी में लोगों की सेहत का कोई सुधलेवा नहीं है। यहां के दो अस्पताल तो पहले से डॉक्टरविहीन थे और अब रीठा साहिब अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) की दो संविदा डॉक्टर एक साथ चिकित्सा अवकाश पर चली गई हैं। उनके अवकाश पर जाने से अस्पताल डॉक्टरविहीन हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब लधिया घाटी के तीनों डॉक्टरविहीन अस्पताल में मरीजों की सेहत का जिम्मा एकमात्र फार्मेसिस्ट दीपक गिरि गोस्वामी के हवाले है। यहां के लोगों को इलाज के लिए न केवल 63 किलोमीटर का फासला तय करना पड़ रहा है, बल्कि जेब भी ढीली करनी पड़ रही है।
लधिया घाटी के सबसे बड़े अस्पताल रीठा साहिब की इमारत में एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत लगी है, लेकिन यहां इलाज के नाम पर सुविधाएं नदारद हैं। यहां डॉक्टरों के तीन पद सृजित थे। एक संविदा डॉक्टर चैताली शर्मा पहले से ही पीजी की पढ़ाई के लिए गई हैं।
दो अन्य संविदा डॉक्टर अपूर्वा रौतेला और डा.विदुषी शर्मा ने भी अब चिकित्सा अवकाश ले लिया है। इस आशय का पत्र मुख्य चिकित्साधिकारी को भेजा गया है। वैसे पिछले साल 2 मई को यहां ज्वाइन करने वाली डा.अपूर्वा रौतेला पिछले साल 1 जुलाई से इस साल 7 फरवरी तक और 16 मई 2016 से यहां कार्यरत डा.विदुषी शर्मा 1 जून 2016 से 31 दिसंबर तक अनुपस्थित रहीं।
बहरहाल एक बार फिर इन दोनों डॉक्टरों के जाने से अस्पताल डॉक्टरविहीन हो गया है और अब यहां की सारी जिम्मेदारी अकेले फार्मेसिस्ट पर है। मंगलवार को भी उन्होंने ही मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करने से लेकर दवा वितरण का काम किया।
वहीं, रीठा से 24 किमी दूर टांण राजकीय एलोपैथिक अस्पताल में भी एक साल से अधिक वक्त से न डॉक्टर है और नहीं फार्मेसिस्ट। ऐसे ही हाल भिंगराड़ा एपीएचसी के भी है। इस अस्पताल में भी डॉक्टर और फार्मेसिस्ट नहीं होने से ताले लटके हैं। इस वजह से अब गुरुद्वारे के लिए प्रसिद्ध लधिया घाटी क्षेत्र की 14 हजार से अधिक आबादी इलाज को मोहताज हो गई है।
लधिया में एएनएम भी नहीं
लधिया घाटी में चौड़ामेहता, मंगललेख, बिनवालगांव में एएनएम केंद्र हैं, लेकिन एएनएम एक भी केंद्र में नहीं है। इसका असर यहां गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के टीकाकरण के काम में पड़ रहा है। महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ तो नहीं मिल पा रहा है। साथ ही टीकाकरण के लिए भी लोहाघाट की दौड़ लग रही है। यहां के ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार बदलने के बाद भी इस दूरस्थ इलाके की सुविधाओं पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
रीठा साहिब की दोनों संविदा डॉक्टरों ने चिकित्सा अवकाश के लिए पत्र दिया है। अवकाश की अवधि उनकी संविदा में नहीं जोड़ी जाएगी। इस अवधि का उन्हें वेतन भी नहीं दिया जाएगा। लधिया की इन अस्पतालों में डॉक्टर और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ तैनात करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। -डा. एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।