चंपावत। काश्तकार नारायण, देवेंद्र राय, गिरीश चंद्र, रमेश के सिटरस प्रजाति के पेड़ सीजन में फलों से लदे रहते हैं, लेकिन इन फलों का कोई मोल नहीं है। बड़े पैमाने पर उत्पादन के बावजूद उन्हें इसकी लागत नहीं मिल पाती। इसकी एक बड़ी वजह इन उत्पादों के मूल्य संवर्द्धन की व्यवस्था का न होना है। जिले में बड़ी क्षमता की एक भी खाद्य प्रसंस्करण इकाई नहीं है।
जिले में सिटरस प्रजाति के फल, सेव, नाशपाती के अलावा टमाटर और आलू की जबर्दस्त पैदावार होती है। जिले में 11349 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर सब्जियों और फलों की खेती होती है, लेकिन इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। जिले में उद्यान विभाग सहित लघु श्रेणी की 11 खाद्य प्रसंस्करण इकाई है। लेकिन इन सामान्य इकाइयों की न तो अधिक क्षमता है और नहीं इनसे सिटरस फलों का जूस निकालने से काश्तकारों को कोई ज्यादा लाभ मिल पाता है। डीएचओ सतीश शर्मा का कहना है कि जिले में फल-सब्जी की बहुतायत में पैदावार होती है, लेकिन इनको बाजार उपलब्ध कराने की विभागीय स्तर पर व्यवस्था नहीं है।
बीयर फैक्ट्री के शुरू नहीं होने से फल उत्पादकों को लग रहा झटका
चंपावत। फल उत्पादकों के लिए उम्मीद की किरण बनने वाली सिन्याड़ी की बीयर फैक्ट्री के शुरू नहीं होने से फल उत्पादकों को तगड़ा झटका लगा है। तीन साल पूर्व इस फैक्ट्री का भवन बनने के साथ ही इसमें उपकरण आदि लग चुके हैं। लेकिन बीयर फैक्ट्री शुरू नहीं हो सकी है। इस फैक्ट्री में नाशपाती, माल्टा, संतरे, नींबू और सेब सहित पहाड़ के अन्य फलों से सालाना 1.08 लाख लीटर बीयर बनाना प्रस्तावित है। बीयर बनाने के लिए बड़ी मात्रा में फलों की जरूरत होगी। इसके शुरू होने से फल उत्पादकों को अच्छा दाम मिलता, लेकिन इसके शुरू होने में अड़ंगा लगा है। जिला आबकारी अधिकारी तपन कुमार पांडेय का कहना है कि निर्माणाधीन फैक्ट्री में कई खामियां होने से इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। खामियों को दूर करने के बाद यहां उत्पादन शुरू करने का लाइसेंस जारी होगा।
फल- क्षेत्रफल (हेक्टेयर) उत्पादन (मैट्रिक टन में)
सेब 619 439
कागजी नींबू: 260 380
गलगल: 406 1041
संतरा: 535 920
माल्टा: 1025 2110
आलू: 4375 39373
अन्य फल व सब्जी 4129 33573
कोट
चंपावत जिले में बड़ी क्षमता की आधुनिक तकनीक की खाद्य प्रसंस्करण इकाई बेहद जरूरी है। इसके बगैर क्षेत्र में उत्पादित फलों का किसानों को लाभ नहीं मिल पाएगा।
महेश चौड़ाकोटी, सूखीढांग।
कोट
जिले में आलू की बहुतायत मात्रा में खेती होती है। लेकिन चिप्स बनाने की एक भी फैक्ट्री नहीं है। इस फैक्ट्री के होने से किसानों को आलू की खेती में अधिक लाभ होता।
पूरन रावत, सल्ली।