चंपावत। राज्य बनने के 16 साल बाद भी पहाड़ की स्वास्थ्य सेवा नहीं सुधर सकी है। नेपाल सीमा से लगे चंपावत जिले में ही आठ स्वास्थ्य केंद्र में कोई डॉक्टर नहीं है। वहीं इन अस्पतालों में से एक (टांण) में तो न डॉक्टर हैं और न ही फार्मेसिस्ट। इसके चलते इन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को 71 किमी दूरी तय करने के लिए समय और पैसा दोनों बर्बाद करने पड़ते हैं।
जिले में 94 डॉक्टरों के सापेक्ष 56 ही कार्यरत हैं। इन कार्यरत डॉक्टरों में से सात परास्नातक (पीजी) कर रहे हैं और छह डॉक्टर लंबे समय से गैरहाजिर हैं। पीजी, गैर हाजिरी के चलते जिले में 43 डॉक्टर ही सेवारत हैं। आठ अस्पतालों में एक भी डॉक्टर नहीं है।
इस वजह से ग्रामीणों को अपने इलाके में अस्पताल होने के बावजूद वक्त पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। टांण के लोगों को 71 किमी दूर लोहाघाट की दौड़ लगानी पड़ती है। इसी तरह श्रीरीठा साहिब, तामली, देवीधुरा आदि गांवों के लोगों को 40 से 61 किमी तक भागना पड़ता है।
जिले के डॉक्टरविहीन स्वास्थ्य केंद्र :
1. अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनबसा।
2. अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चौड़ामेहता।
3. अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तामली।
4. स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी टांण।
5. स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी खेतीखान।
6. स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी स्वांला।
7. स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी धौन।
8. स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी चल्थी।
लंबे समय से छुट्टी पर गए डॉक्टर :
चौड़ामेहता : डॉ. चेताली शर्मा, डॉ. विदुषी शर्मा, डॉ. अपूर्वा रौतेला।
टांण : डॉ. कमल गौनिया।
चल्थी : डॉ. नेहा मिश्रा।
पुलहिंडोला : डॉ. राकेश प्रजापति।
पीजी प्रशिक्षण पर गए डॉक्टर :
देवीधुरा : डॉ. दीप्ति जोशी।
धौन : डॉ. आदित्य विक्रम सिंह।
स्वांला : डॉ. मेघा गुप्ता।
चल्थी : डॉ. मुजीबुर्रहमान।
टनकपुर : डॉ. रुचि भट्ट।
जिला अस्पताल : डॉ. प्रदीप बिष्ट, डॉ. राशि भटनागर।