आज मजदूर दिवस है। मजदूरों की बेहतरी के लिए तमाम दावे और वादे किए जाने का दिन। लेकिन मजदूरों की दयनीय स्थिति किसी से छुपी नहीं है। रोज कमा कर खाने वाले इन मजदूरों को यदि किसी दिन काम नहीं मिला तो घर में चूल्हा तक नहीं जलता। चंपावत में काम नहीं मिलने पर उदास बैठे इन मजदूरों के दर्द को नीति नियंता शायद ही समझ सकें।