फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Champawat News: कुमाऊंनी भाषा हमारी पहचान, इसमें झलकता है अपनापन

Sun, 10 Nov 2024 11:03 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
विज्ञापन
विज्ञापन
चंपावत। जिला मुख्यालय के गोरल चौड़ स्थित आडिटोरियम में तीन दिनी 16वें राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन का शुभारंभ हो गया है। सम्मेलन में कुमाऊंनी साहित्य सेवा में योगदान देने वाले विद्वान साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने यह हमारी पहचान है और इसमें अपनापन झलकता है।
विज्ञापन

रविवार को जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय ने राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से कुमाऊंनी भाषा का प्रचार प्रसार होगा। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी में कुमाऊंनी भाषा का प्रचार प्रसार तेजी से करना जरूरी है।
यह हमारी पहचान है और इसमें अपनापन झलकता है। इस दौरान ओपन वर्ग में कुमाऊंनी भाषा में विवाह कार्ड निर्माण की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
इसमें होली विजडम स्कूल मानेश्वर की छात्रा चेतना पांडेय और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पल्सों की हर्षिता शर्मा प्रथम, उदयन इंटरनेशनल स्कूल के रचित सक्टा द्वितीय, एंजल एकेडमी की लक्षिता गोस्वामी और गर्विता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
विज्ञापन

निर्णायक डॉ. सुनील कुमार और डाॅ. रुचिर जोशी रहे। विजेताओं को उत्तराखंड भाषा संस्थान की अपर निदेशक जसविंदर कौर ने पुरस्कार प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने कुमाऊंनी भाषा को लेकर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
इससे पूर्व छोलिया दल के साथ बस स्टेशन से गोल्ज्यू मंदिर होते हुए गोरलचौड़ सभागार तक साहित्यकारों, कवियों, भाषा प्रेमियों ने रैली निकाली। यहां गीतांजलि ट्रस्ट के सतीश पांडेय, ब्लाॅक प्रमुख रेखा देवी, उप जेष्ठ प्रमुख मोनिका बोहरा, बीसी जोशी, कमलेश शक्टा, नवीन पंत, राजेंद्र गहतोड़ी, नीरज जोशी आदि मौजूद रहे।
सम्मेलन का आयोजन उत्तराखंड भाषा संस्थान, कुमाऊंनी भाषा साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति और पहरू कुमाऊंनी मासिक पत्रिका की ओर से किया गया।

द्वी घरनकि लाज का विमोचन
चंपावत। राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में न्यू सेरा पिथौरागढ़ निवासी पूर्व प्रधानाध्यापिका और साहित्यकार डाॅ. आनंदी जोशी की लिखित कुमाऊंनी कहानी संग्रह ''द्वी घरनकि लाज'' का विमोचन किया गया। इसमें 11 कुमाऊंनी कहानियां हैं। वक्ताओं ने कहा कि यह कहानी कुमाऊंनी भाषा के प्रचार प्रसार के लिए कारगर साबित होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें