चंपावत जिले के लोहाघाट में तेजी से किया जा रहा है निर्माणाधीन कोलीढेक झील का कार्य।
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चंपावत। जिले के लोहाघाट क्षेत्र में कोलीढेक झील के निर्माण का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। सिंचाई विभाग की ओर से अप्रैल में कोलीढेक झील पूरी तरह से अस्तित्व में आने का दावा किया गया है। शासन की ओर से झील निर्माण के लिए फरवरी में छह करोड़ रुपये की एक और किस्त जारी कर दी गई है।
अब तक झील निर्माण के लिए 30 करोड़ 76 लाख 12 हजार रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष 29 करोड़ 25 लाख 37 हजार रुपये की राशि विभाग को अवमुक्त हो चुकी है। इसमें से झील के डूब क्षेत्र में आ रही नाप भूमि के काश्तकारों को छह करोड़ 18 लाख 13 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर बांटे जा चुके हैं। छह करोड़ 78 लाख 75 हजार रुपये का मुआवजा काश्तकारों को वितरित किया जाना शेष है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता बीपी पांडेय के अनुसार झील के निर्माण में आने वाली वन भूमि के लिए 59 लाख चार हजार रुपये वन विभाग को हस्तांतरित किया जा चुका है। वर्ष 2012 में झील परियोजना के लिए 27 करोड़ 13 लाख 94 हजार रुपये का आगणन तैयार किया गया था। बाद में परियोजना की लागत बढ़ने से तीन करोड़ 62 लाख 18 हजार रुपये की और बढ़ोत्तरी की गई।
झील निर्माण में यह कार्य रह गए हैं अवशेष
चंपावत। कोलीढेक झील निर्माण के अंतिम चरण में अभी डैम मानिटरिंग सेफ्टी सिस्टम गेट, कंट्रोल रूम फिनिशिंग, पैरापिट निर्माण और इंस्टॉलेशन और लैंड स्केपिंग का कार्य होना अवशेष है। सिंचाई विभाग के अपर सहायक अभियंता अमित उप्रेती के अनुसार अवशेष निर्माण कार्य को युद्ध स्तर पर तेजी से पूरा किया जा रहा है। निर्माणाधीन झील की लंबाई 1450 मीटर, चौड़ाई 70 मीटर औसतन गहराई 12 मीटर है।
झील निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई है 14.012 हेक्टेयर भूमि
चंपावत। कोलीढेक झील निर्माण के लिए सिंचाई विभाग की ओर से 14.012 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई है। इसमें ग्राम कोली की 9.512 हेक्टेयर, फोर्ती ग्राम पंचायत की 0.764 हेक्टेयर नाप भूमि के अलावा 3.192 हेक्टेयर राजस्व भूमि और 1.308 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है।