आदम जनजाति वन रावत बाहुल्य खिरद्वारी गांव का नाम पिछड़ेपन के लिए जाना जाता है। चुनाव के दौर में भी यह अजीबो-गरीब खूबियों के लिए ही जाना जाता है। यहां के इकलौते मतदेय स्थल के लिए बाकायदा एक सेक्टर बनाया गया है। यह प्रदेश के चुनिंदा सेक्टरों में है, जहां एक सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है।
चुनाव संचालन के लिए दो विधानसभा सीट वाले चंपावत जिले को 4 जोन और 49 सेक्टर में बांटा गया है। इन तमाम सेक्टरों में 320 मतदेय स्थल हैं। यानि औसतन एक सेक्टर में छह से अधिक मतदेय स्थल। जिले में खिरद्वारी ऐसा सेक्टर है, इसके तहत सिर्फ एक मतदेय स्थल है। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित चल्थी से करीब 14 किलोमटर पैदल दूरी पर स्थित खिरद्वारी के राजकीय प्राथमिक स्कूल में यह मतदेय स्थल है। सेक्टर मजिस्ट्रेट ओम कुमार का कहना है कि मतदेय स्थल में 189 महिलाओं समेत कुल 409 वोटर हैं। इस बूथ की निगरानी का जिम्मा सेक्टर मजिस्ट्रेट का है। मतदेय स्थल तक बिजली भी नहीं है। अलबत्ता सोलर लाइट के जरिए इस कमी को दूर किया जा रहा है।
16 मतदेय स्थल वाला सबसे बड़ा सेक्टर
जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ.अहमद इकबाल ने बताया कि जिले की दोनों विधानसभा सीटों के कुल 285 मतदान केंद्रों में 320 मतदेय स्थल हैं। चंपावत सीट के 113 केंद्रों के 142 मतदेय स्थलों को दो जोन और 20 सेक्टर, लोहाघाट सीट के 172 मतदान केंद्रों के 178 मतदेय स्थलों को दो जोन और 29 सेक्टरों में बांटा गया है। चंपावत विधानसभा सीट में सबसे बड़ा सेक्टर चंपावत है, जहां 16 मतदेय स्थल हैं। इन मतदेय स्थलों में कुल वोटर हैं, जबकि लोहाघाट सीट में सबसे बड़ा सेक्टर लोहाघाट हैं, जहां 13 मतदेय स्थल हैं। लोहाघाट में सबसे छोटा सेक्टर 2 मतदेय स्थल वाला गोलडांडा है।
वनरावत को विकास से रोड तक का इंतजार
आदम जनजाति वनरावतों से पहचान रखने वाला खिरद्वारी गांव को विकास से लेकर रोड तक का इंतजार है। राज्य बनने के बाद से ही यहां के लोग विधानसभा, लोकसभा और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को मिलाकर कुल 9 बार वोट दे चुके हैं पर हालात में नामभर का भी सुधार नहीं। बिजली का उजाला गांव में नहीं है। अस्पताल की कोई व्यवस्था नहीं। यहां तक कि आठवीं से आगे की पढ़ाई को भी उन्हेें पांच किमी दूर दौड़ लगानी पड़ती है।
जिले के इस अकेले आदम गांव के 28 परिवार और 919 लोग बुनियादी सुविधा को तरस रहे हैं। पोथ ग्राम पंचायत की प्रधान लक्ष्मी देवी कहती हैं कि हाईस्कूल न होने से यहां का एक भी व्यक्ति आठवीं से आगे नहीं पढ़ सका है। बीमार हो या गर्भवती महिलाएं, सभी को इलाज के लिए 17 किमी पैदल चलकर चल्थी जाना होता है। एएनएम केंद्र की मांग भी पूरी नहीं हो सकी है। धारचूला के दो बार विधायक रहे गगन सिंह के मामा और गांव के बुजुर्ग दान सिंह कहते हैं कि सस्ते गल्ले की दुकान से राशन लाने को भी 17 किमी का पैदल फासला तय करना उनकी नियति है। गेहूं पीसाने के लिए भी वनरावत तीन किमी की दौड़ लगाते हैं।
खिरद्वारी को लोडियालसेरा से जोड़ने के लिए लधिया नदी पर करीब पांच साल पूर्व रोपवे बनाया गया था। लेकिन मोटर खराब होने के बाद इसे ठीक नहीं कराया जा सका। रोपवे का संचालन करने वाले ग्रामीण जीत सिंह कहते हैं कि अनेकों बार इसे ठीक करने के लिए आग्रह किया गया, मगर अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।