चंपावत। जिले के टनकपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास जल्द ही सौर ऊर्जा की रोशनी से जगमग होगा। बालिका छात्रावास के अलावा टनकपुर में ही स्थित सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) कार्यालय भी जल्द ही सौर ऊर्जा की रोशनी से जगमग हो जाएगा।
इन दोनों ही स्थानों में उत्तराखंड वैकल्पिक ऊर्जा विभाग (उरेडा) की ओर से पांच-पांच किलोवाट के चार सोलर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। जो बालिका छात्रावास और एआरटीओ कार्यालय की बिजली की खपत को कम करने में सहायक हो सकेंगे। उरेडा के परियोजना अधिकारी मनोज बजेठा के अनुसार जिला योजना में अवमुक्त 22 लाख रुपये की लागत से कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास और एआरटीओ कार्यालय में सोलर प्लांट लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। गर्मी के मौसम में बिजली की खपत अधिक होने के कारण यह सौर संयंत्र बिजली की खपत को कम करने के साथ ऊर्जा बचाने में मददगार होंगे।
ग्रिड को बेची जा रही है सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली
चंपावत। जिले में सौर ऊर्जा के जरिये बिजली उत्पादन की मांग बढ़ती जा रही है। उरेडा विभाग की ओर से कोरोना काल में पहली बार शुरू की गई मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने के लिए आवेदन करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक 60 से अधिक लोग सोलर प्लांट लगाने के लिए विभाग में आवेदन कर चुके हैं। जबकि बीते दो सालों में 103 लोगों की ओर से सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली उत्पादित कर ग्रिड को बेची जा रही है। (संवाद)
सोलर फेंसिंग की मांग भी बढ़ी
चंपावत। जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग लगाने की मांग भी लगातार बढ़ रही है। उरेडा विभाग की ओर से जिले के तराई क्षेत्र के कई गांवों में सोलर फेंसिंग का सफलता पूर्वक प्रयोग किए जाने के बाद पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों की ओर से जानवरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए सोलर फेंसिंग लगाने की मांग उठाई जा रही है। (संवाद)