चंपावत जिले के चौकी ग्राम पंचायत में महिला समूह की ओर से तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद।
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चंपावत। कोरोना काल में दूसरे राज्यों से घर आए प्रवासियों के लिए कामाक्षी त्रिपाठी प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। छह महीने पहले दिल्ली से लौटी कामाक्षी ने जिला मुख्यालय के समीपवर्ती चौकी ग्राम पंचायत में महिलाओं का समूह बनाकर स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग कर उनकी मार्केटिंग शुरू की है। उनके समूह की ओर से तैयार विभिन्न उत्पाद आसानी से बाजार में बिक रहे हैं। स्वयं रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ कामाक्षी ने गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़ने में सफलता प्राप्त की है।
उनकी ओर से तैयार मॉडल को अन्य गांवों ने भी अपनाने का निर्णय लिया है। कामाक्षी त्रिपाठी एलएलबी की पढ़ाई करने के बाद दिल्ली में रहती थीं। लॉकडाउन के दौरान घर वापसी हुई तो उन्होंने यहीं रहकर स्वरोजगार करने का मन बनाया और गांव की महिलाओं को जोड़कर समृद्धि स्वयं सहायता समूह का गठन किया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उत्पादित विभिन्न प्रकार की दालों, तिलहनों, मसालों, त्यौहारों में बनने वाले विशेष कलाकृतियों आदि को आकर्षक पैक में ब्रांडिंग कर बाजार में उतारा। अभी उनके समूह में छह महिलाएं काम कर रही हैं, जो स्वयं स्थानीय उत्पादों को खरीद कर उनकी ग्रेडिंग और पैकेजिंग कर रही हैं। कामाक्षी ने बताया कि जल्द ही आसपास की महिलाओं को भी इसमें जोड़ा जाएगा। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण की सहायक परियोजना निदेशक विम्मी जोशी के अनुसार कामांक्षी के अभियान को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जोड़कर अधिक से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
अब तक 25 हजार से अधिक प्रवासी पहुंचे
चंपावत। कोरोना महामारी के कारण जिले में अब तक विभिन्न राज्यों से 25 हजार से अधिक प्रवासी वापस घर आ चुके हैं। छह माह की अवधि बीतने के बाद भी अधिकांश प्रवासियों को रोजगार के लिए इंतजार करना पड़ रहा हैै। जिसके चलते कई प्रवासियों का महानगरों की ओर वापस जाना भी शुरू हो गया है। संवाद