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ंगल संवाद: समूह की महिलाओं को राज्यपाल देंगी सफलता के सूत्र

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वमनपुरी में हाथ से निर्मित टोकरी और अन्य सामग्री के साथ समूह की महिलाएं। (फाइल फोटो) - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। वमनपुरी गांव की नीरू राणा, राखी राणा, कृष्णा राणा और लता मंगेश के लिए मंगलवार खास है। हस्तशिल्प के खास हुनर के चलते तीन समूह की चार महिलाओं को राज्यपाल से मुलाकात का यह मौका मिला है। भूमिसेन, समाज और हरियाली स्वयं सहायता समूह की इन हुनरमंद महिलाओं को राज्यपाल बेबी रानी मौर्य सफलता के सूत्र बताएंगी। हाथ से टोकरी और अन्य कलात्मक सामान बनाना समूह की इन महिलाओं की आदत में शुमार था, लेकिन एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के 34 दिन के प्रशिक्षण ने उन्हें खास तरीके का कौशल दिया।
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नीरू राणा बताती हैं कि प्रशिक्षण और ग्राम्य विकास विभाग की मदद से काम करना आसान हुआ। घास और बेंत सहित तमाम कच्चा माल पास के ही जंगल में मिल जाता है। उसे आकार देकर टोकरी, हैंड बैग, ट्रे, गमले सहित अन्य कलात्मक सामग्री बनाई जाती है। एक टोकरी को बनाने में एक महिला को दो से तीन दिन लगते हैं। इस साल फरवरी में चंपावत गोरलचौड़ मैदान में हुए महोत्सव में पहली बार लगाए स्टाल में 80 टोकरियों की बिक्री हुई। राणा कहती हैं कि कोरोना की वजह से टोकरियों का काम प्रभावित रहा। अब फिर से इन कलात्मक सामग्रियों का तेजी से निर्माण किया जाएगा।
हुड्डी नदी से गांव के भूकटाव को भी उठाएंगी
हस्तशिल्प से नाम कमाने वाली ये महिलाएं राज्यपाल से संवाद करने का मौका मिलने से गदगद हैं। हस्तशिल्प के अलावा ये महिलाएं अपने गांव वमनपुरी की समस्याओं के समाधान का भी राज्यपाल से अनुरोध करेंगी। भूमिसेन स्वयं सहायता समूह की नीरू राणा बताती हैं कि हुड्डी नदी के किनारे बसे वमनपुरी गांव की 25 बीघा से अधिक जमीन राज्य बनने के बाद से अब तक भूकटाव में बह चुकी है। भूकटाव से बचाव के उपाय के अलावा जंगली जानवरों का आतंक भी खेती पर भारी पड़ रहा है। करीब 1300 की आबादी वाले खेती मजदूरी पर आश्रित होने से गांव के ज्यादातर लोग गरीब हैं। महिलाओं का कहना है कि इन जमीनी मुद्दों पर भी राज्यपाल से बात करेंगी।
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कोट
इन समूह की महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देने के अलावा दस हजार रुपये का रिवाल्विंग फंड, डेढ़ हजार का स्टार्टअप फंड और दो लाख रुपये कम्युनिटी इंवेस्टमेंट फंड दिया गया है। साथ ही बैंक से 50 हजार रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट बनाई गई है। प्रति ग्राम संगठन को 1.10 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा निर्मित सामग्री की बिक्री को बाजार उपलब्ध कराने और बनबसा में एक दुकान आवंटित की जाएगी।
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बीबी जोशी,
एबीडीओ, चंपावत।
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