इंटरमीडिएट तक छात्राओं को निशुल्क पढ़ाई की सुविधा है, मगर दूरदराज के कुछ स्कूलों की छात्राओं को बोर्ड परीक्षा देने में करीब पांच हजार रुपये खर्च करने पड़े हैं। ये नौबत उनका परीक्षा केंद्र दूर होने की वजह से आई, जहां उन्हें रहने के लिए किराए का कमरा लेना पड़ा।
छात्राओं को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने को साइकिल योजना से लेकर इंटर पास होने के बाद निर्धन छात्राओं को गौरा देवी कन्या धन योजना के अंतर्गत 50 हजार हजार रुपये दिए जाते हैं, मगर जिले के डांडा राजकीय इंटर कॉलेज के हाईस्कूल के छात्र-छात्राओं को बोर्ड परीक्षा देने के लिए चार से पांच हजार रुपये खर्च करने पड़े है।
डांडा, ककनई और आसपास के 30 छात्र-छात्राओं को जिंदगी की पहले बड़े इम्तिहान के लिए खूब पापड़ बेलने पड़े हैं। इनका परीक्षा केंद्र डांडा से 59 किलोमीटर दूर आमबाग में रहा। हाईस्कूल बोर्ड की परीक्षा देने वाले गजेंद्र सिंह, बबीता बोहरा सहित तमाम छात्रों का कहना है कि दो मार्च से दो अप्रैल तक उन्हें किराए में टनकपुर में रहना पड़ा।
इन परीक्षार्थियों का कहना है कि घर से दूर परीक्षा देने के लिए आने से न केवल अतिरिक्त खर्च हुआ, बल्कि उनकी तैयारी पर भी असर पड़ा है, जिस कारण उनके नंबर भी कम आ सकते हैं। यहां के छात्र-छात्राएं विष्णुपुरी, शारदा चुंगी, बोहरागोठ में किराए में रहने को मजबूर हुए। उनके साथ परिवार का एक सदस्य भी रहा। ग्राम प्रधान खष्टी देवी के अलावा इन छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा के दौरान यहां रहने के लिए उन्हें गृहस्थी जोड़नी पड़ी। चारपाई से लेकर खाने के लिए केरोसिन तेल, गैस सिलेंडर की व्यवस्था करनी पड़ी। इसमें उनके करीब पांच हजार रुपये खर्च हुए।
बोर्ड परीक्षा केंद्रों का निर्धारण उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद करता है। इसके निर्धारण में छात्र संख्या के अलावा स्कूल और परीक्षा केंद्रों के बीच की दूरी का मानक है। डांडा 2015 में उच्चीकृत होकर राजकीय इंटर कॉलेज बना। अगले साल यहां इंटरमीडिएट के परीक्षार्थी भी होंगे। यहां की विषम भौगोलिक हालत और दूरी को देखते हुए विभाग भविष्य में डांडा का प्रस्ताव भेजेगा। -नवीन चंद्र पाठक, जिला शिक्षाधिकारी, चंपावत।