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झूमाधुरी महोत्सव में निकला मां भगवती व महाकाली में उमड़े श्रद्धालु

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चंपावत के नंदा-सुनंदा महोत्सव में कदली वृक्ष को बालेश्वर मंदिर ले जाते देवडांगर और श्रद्धालु। - फोटो : CHAMPAWAT
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झूमाधुरी नंदाष्टमी महोत्सव में पाटन-पाटनी एवं राईकोट महर गांव से मां भगवती और मां महाकाली की निकली रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया। शुक्रवार सुबह दोनों गांवों के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई।
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सात हजार फीट की खड़ी चढ़ाई पार करता हुआ पाटन पाटनी से मां भगवती का पहला डोला करीब 3.50 बजे मां झूमाधुरी मंदिर पहुंचा। डोले में मां भगवती के डांगर के रूप में अवतरित उमेश चंद्र पाटनी और धन सिंह पाटनी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रहे थे। खाल तोक में पूजा-अर्चना के बाद सीधी खड़ी चढ़ाई में श्रद्धालुओं ने रस्सों के सहारे डोला रथ यात्रा को मंदिर की परिक्रमा कराई।
पांच किमी खड़ी चढ़ाई पार करते हुए राईकोट महर गांव से भी मां भगवती और महाकाली की रथ यात्रा करीब तीन बजे झूमाधुरी को रवाना हुई। पसीने से लथपथ श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते हुए रस्सों को खींच रहे थे। रथ में सवार भगवती के डांगर दान सिंह और मां महाकाली के रूप में अवतरित होकर राधिका देवी ने भक्तों को चंवर झुलाकर आशीर्वाद दिया। दोनों रथों के पीछे महिलाएं खोल दे माता खोल भवानी धार में केवाड़ आदि मां के जयकारे लगाते हुए चल रही थीं।
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महिलाओं ने किया रात्रि जागरण
लोहाघाट (चंपावत)। बृहस्पतिवार रात को पाटन-पाटनी एवं राईकोट महर गांव में रात्रि जागरण हुआ। लोक देवताओं ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। वहीं मां झूमादेवी मंदिर में महिलाओं ने दीपक लेकर रात्रि जागरण किया। मान्यता है कि झूमाधुरी मंदिर में सच्चे मन से मां की आराधना करने वाली नि:संतान महिलाओं की गोद भर जाती है। श्रद्धालुओं के लिए पूर्व जिला पंचायत सदस्य सचिन जोशी, सुनील चौबे ने शरबत की व्यवस्था की थी।
रौरुड़या से बालेश्वर मंदिर पहुंचा कदली वृक्ष
चंपावत। नंदा-सुनंदा महोत्सव में शुक्रवार को कदली वृक्ष को लाकर मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति बनाई गई। इस दौरान मां नंदा-सुनंदा के जयकारों और मंत्रोच्चारण से मंदिर क्षेत्र गुंजायमान रहा।
बालेश्वर महादेव मंदिर में सुबह पुरोहित पंडित गिरीश कलौनी, दीपक कुलेठा और हरीश जोशी ने धार्मिक अनुष्ठान किया। पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा, महोत्सव समिति के अध्यक्ष शंकर पांडेय, दिनेश पटवा, विकास साह, एनडी गड़कोटी, रितेश राय, प्रकाश पांडेय, सुरेश पांडे, निर्मल चंद्र पुनेठा, प्रेमा पांडेय, मेनका साह, मुन्नी पांडेय, हेमा पटवा आदि ने पूजा-अर्चना कराई।
इसके बाद देव डांगर हरीश पांडेय, देवीलाल वर्मा, विवेकानंद बिष्ट, सुधीर साह, गौरव वर्मा, सौरभ वर्मा, मोहनी साह, मंजू राय, तारा पटवा, गुड़िया वर्मा, रीता तड़ागी, अनीता साह, रवि पटवा, शांति पटवा आदि अवतरित होकर तल्लीहाट, मल्लीहाट, नागनाथ, राजबुंगा होते हुए रौरुड़या पहुंचे जहां से कदली वृक्ष को बालेश्वर महादेव मंदिर लाया गया। इसके बाद केले के पत्तों से मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति बनाई गई। पुरोहितों ने पूजा-अर्चना कर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की।

चंपावत के नंदा-सुनंदा महोत्सव में पूजा-अर्चना अनुष्ठान करते पुरोहित।- फोटो : CHAMPAWAT

झूमाधूरी महोत्सव में राईकोट महर से निकली मां महाकाली और माँ भगवती की रथ यात्रा को मंदिर की ओर ले ज?- फोटो : LOHAGHAT

झूमाधूरी महोत्सव के तहत पाटन-पाटनी गांव से दुर्गम चढाई पार कर मां भगवती की डोला यात्रा को मंदिर क?- फोटो : LOHAGHAT

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