चंपावत जिला अस्पताल में लगे नसबंदी शिविर में ऑपरेशन से वंचित महिलाएं।
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चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के सौराई गांव की महिला आशा कार्यकर्ता गोदावरी देवी के साथ दो महिलाएं ढाई हजार रुपये में जीप बुक करा नसबंदी के लिए चंपावत जिला अस्पताल आईं, लेकिन वह मायूस लौटीं। इसी तरह वमनगांव की दो महिलाएं अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर नसबंदी के लिए जीप में तीन हजार रुपये खर्च कर और एक महिला चौड़ाख्याली से तीन हजार रुपये खर्च कर चंपावत पहुंची। लेकिन इनमें से किसी की भी नसबंदी नहीं की जा सकी। घुड़चम, कालूखांण, अमकड़िया, चौड़ा राजपुरा आदि गांव की महिलाएं भी मायूस होकर लौटीं।
इन महिलाओं के साथ आई आशा कार्यकर्ता हेमा जोशी, कमला पंगरिया, लक्ष्मी देवी, मीना जोशी, विद्या देवी आदि का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों से अनुनय विनय की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। दो तिमारदार दीपक जोशी और जगदीश जोशी का कहना था कि नसबंदी करने के लिए मोटी रकम खर्च करने के बाद वे दूर गांव से यहां पहुंचे, लेकिन अस्पताल में उनकी उपेक्षा हुई। दूरदराज से आए लोगों में से कई वापस हो गए, तो कुछ यहां होटल लेकर रहे। बता दें कि सोमवार को जिला अस्पताल में आयोजित शिविर में 80 महिलाओं की नसबंदी हुई।
शिविर में महिलाओं की संख्या ज्यादा हो गई थी। इस कारण कुछ महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन नहीं हो सके। जो महिलाएं छूट गई, उनके लिए नसबंदी शिविर मंगलवार को लगाया जाएगा।
डॉ. आरपी खंडूरी सीएमओ, चंपावत।