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चलते-फिरते अस्पतालों के भी पहिये जाम

Sat, 16 Sep 2017 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
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चंपावत में बीते सत्रह माह से खड़ा स्वास्थ्य वाहन। - फोटो : अमर उजाला
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बीमारों को तंदरुस्त करने वाले अस्पतालों की तबियत खुद बीमार है। जिले के अधिकांश अस्पतालों के हाल चिकित्सकों की कमी और अन्य कारणों से खराब है। ज्यादातर अस्पताल ही नहीं, यहां के दो सचल चिकित्सालय (चलते-फिरते अस्पताल) वाहनों के पहिये भी लंबे अर्से से जाम है, अगर ये चिकित्सा वाहन काम कर रहे होते, तो लोगों को आपात चिकित्सा सेवा 108 के बंद होने का खामियाजा इस कदर नहीं भुगतना पड़ता।

2009 से शुरू जैन वीडियो ऑन व्हीकल वाहन सेवा अप्रैल 2016 से बंद है। सेवा के बंद होने से पूर्व तक इसके जरिये तल्लादेश, गुमदेश, लधिया घाटी, अमोड़ी सहित कई ग्रामीण इलाकों में हर माह निर्धारित तिथि को 15 शिविर लगाए जाते रहे थे। सामान्य इलाज के अलावा इन शिविरों में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और खून की जांच भी होती थी। गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले (बीपीएल) मरीजों को निशुल्क दवाएं दी जाती थी। तीन डॉक्टर, लैब तकनीशियन, फार्मेसिस्ट, नर्स सहित कुल 11 कर्मचारी वैन के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों का इलाज करते थे। मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के डॉक्टरविहीन अथवा अस्पतालविहीन इलाकों को लाभ मिल रहा था। पर यह सेवा भी पिछले साल से जवाब दे गई। 
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पैरा लीगल वालंटियर उमेश भट्ट, एचएस आर्य, माधो सिंह, दीपक बोहरा आदि ग्रामीणों का कहना है कि इस सेवा के ठप होने से सड़क से लगे अस्पतालविहीन दूरदराज के गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ी है। उन्हें अब लोहाघाट, चंपावत में इलाज को जाना पड़ रहा है। जिला समन्वयक रहे कुलदीप का कहना है कि बजट नहीं मिलने की वजह से वैन काम नहीं कर पा रही है। 


31 लाख के मोबाइल वैन से लगे सिर्फ 39 शिविर
चंपावत। अस्पताल परिसर में 81 महीनों से सचल चिकित्सा वाहन खड़ा है। दिसंबर 2010 से इस वाहन ने एक भी मरीज का इलाज नहीं किया। 2006 में राष्ट्रीय सम विकास योजना से 31.5 लाख रुपये की चलित शल्य चिकित्सालय एवं परीक्षण वाहन (मोबाइल वैन) चंपावत को मिला। दिसंबर 2010 के बाद से एक भी मरीज का इलाज नहीं हुआ है। अस्पताल परिसर के एक कोने में दुबकी इस वैन पर जंग लग चुका है। धन नहीं मिलने से मोबाइल वैन का संचालन ठप है। वैन से हर साल 72 शिविर लगाए जाने थे, मगर एक वर्ष में 72 तो दूर, 2006 से शुरू इस मोबाइल अस्पताल से अब तक सिर्फ 39 शिविर लगाए गए हैं। इसके अलावा आरोग्य सेवा के पहिये भी जाम है।


पांच माह से वेतन भी नहीं मिला 
जैन वीडियो ऑन व्हीकल वाहन सेवा तो बंद हुई ही, इसमें सेवा देने वाले कार्मिकों को भी पांच माह से वेतन नहीं मिला है। सेवा के बंद होने के समय जिला समन्वयक रहे कुलदीप का कहना है कि अप्रैल में सेवा बंद होने से नवंबर 2015 से मार्च 2016 तक के पांच महीनों का डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों का वेतन भी नहीं दिया गया है।
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कोट 
जैन व्हीकल सचल सेवा का अनुबंध मार्च 2016 में खत्म हो गया था। निदेशालय से अब तक न तो नया अनुबंध किया गया है और नहीं पुराने अनुबंध का नवीनीकरण किया गया। वहीं राष्ट्रीय सम विकास योजना से संचालित मोबाइल वैन को चलाने के लिए तो वर्षों से धन नहीं मिल सका है। साथ ही इसके लिए स्टाफ भी नहीं है। इन कमियों को दूर करने के लिए फिर से पत्र भेजा जाएगा। -डॉ.एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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