अब इस स्थान पर नहीं बनेगी चंपावत की जिला जेल।
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चंपावत। जिले को जिला जेल के लिए अभी और इंतजार करना होगा। निर्माणाधीन जिला जेल का काम आठ साल से रुका है। अब स्थान बदलने की नौबत आ रही है। इसके लिए नई जगह तलाश करने के निर्देश दिए गए हैं।
तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने जून 2008 में चंपावत जिला जेल भवन का शिलान्यास किया था। गोरलचौड़ मैदान के नजदीक निर्माणाधीन जेल भवन के लिए निर्माण कार्य शुरू भी हुआ। निर्माण कार्य को तीन साल में पूरा होना था, लेकिन तीन साल में सवा करोड़ रुपये से अधिक से चहारदीवारी ही बन सकी, लेकिन 2012 से धन न मलने से काम रुका है। कई साल पहले जेल भवन के लिए 15 करोड़ रुपये शासन से मांगे गए थे, लेकिन यह रकम नहीं मिली। अलबत्ता अब मौजूदा जिला जेल भवन को दूसरी जगह शिफ्ट करने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए जमीन तलाशने के निर्देश दिए गए हैं।
रैनबसेरा, बरातघर के रूप में होगा उपयोग
चंपावत। विधायक कैलाश गहतोड़ी ने बताया कि गोरलचौड़ मैदान और जीजीआईसी के पास जेल का भवन उचित नहीं है। लोगों की भी इसे लेकर लगातार आपत्ति रही है। इसके चलते इस स्थान पर किसी भी हाल मेें जेल भवन का निर्माण नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन को जेल भवन के लिए नई जगह भूमि की तलाश के लिए निर्देशित किया गया है। अधूरे जेल भवन को नया रंग-रूप देकर रैनबसेरा और बरातघर के रूप में नगर पालिका के माध्यम से किया जाएगा।
लोहाघाट बंदीगृह में रह रहे 23 कैदी
चंपावत। जिला जेल न होने से चंपावत जिले के कैदियों को लोहाघाट के राजस्व विभाग के पुराने बंदीगृह में रखा जाता है लेकिन इस बंदीगृह की हालात ठीक नहीं है। कुल चार कमरों वाली इस बंदीगृह की क्षमता 30 कैदियों को रखने की है, लेकिन इसमें तीन महिला और 20 पुरुष कैदी रखे गए हैं।