चंपावत। जिले का सबसे पुराना टनकपुर आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) स्मार्ट बनने की राह पर है। अगले डेढ़ महीने में इसकी तस्वीर बदल जाएगी। विश्व बैंक की मदद से यह संस्थान मॉडल आईटीआई में शुमार हो जाएगा।
इसके बाद न केवल प्रशिक्षण के परंपरागत ढर्रे में बदलाव होगा बल्कि मौजूदा दौर की तकनीक के उपयोग से गुणवत्ता भी बेहतर होगी। मॉडल आईटीआई का काम पूरा होने के बाद इसका संचालन राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के अनुरूप किया जाएगा। इससे रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी हो सकेगी।
टनकपुर में 1976 में स्थापित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्णानंद जोशी आईटीआई सबसे पुराने आईटीआई में शुमार है। इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रॉनिक, मोटर मैकेनिक, फीटर, स्टैनो, फैशन डिजाइनिंग और कटिंग एवं सिलाई ट्रेड में 172 छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस आईटीआई को विश्व बैंक के सहयोग से 25 करोड़ रुपये की लागत से मॉडल आईटीआई बनाया जा रहा है।
आधारभूत ढांचे को बेहतर करने के साथ प्रशिक्षण के लिए इंटरनेट तकनीक का उपयोग होगा। 95 प्रतिशत से अधिक काम पूरा कर लिया गया है। बचा काम एक माह में पूरा करा लिया जाएगा। नए सत्र से इलेक्ट्रीशियन और मोटर मैकेनिक में एक-एक यूनिट बढ़ेगी। इससे दोनों ट्रेड में 22-22 छात्र-छात्राओं को और प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।
मॉडल आईटीआई बनने से होंगे लाभ
नई तकनीक के उपयोग से प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधरेगी।
मौजूदा समय की जरूरतों के अनुरूप उद्योग आधारित पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण मिलेगा।
फोरमैन और अन्य प्रशिक्षकों को भी प्रशिक्षित करने के साथ आधुनिक पाठ्यक्रम जुड़ेंगे।
टनकपुर आईटीआई को मॉडल बनाने के लिए आधारभूत सुविधाओं को बेहतर किया जा रहा है। 95 प्रतिशत से अधिक काम ब्रिडकुल पूरा करा चुकी है। एक महीने में बचा काम पूरा हो जाएगा। मॉडल आईटीआई बनने से प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होने से रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। -कवींद्र सिंह कन्याल, प्रधानाचार्य, आईटीआई, टनकपुर।