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अमर उजाला अभियान:खेतीखान आईटीआई को लेकर मुखर हो रहे लोग

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उषा जोशी। - फोटो : CHAMPAWAT
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पाटी विकासखंड के तीन दशक पुराने खेतीखान के आईटीआई की बदहाली से लोगों में गुस्सा पनप रहा है। 1989 में खुले इस आईटीआई में वायरमैन, इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रानिक्स, वायरलेस और रेडियो व टेलीविजन ऑपरेटर ट्रेड मंजूर हैं लेकिन वायरलेस और रेडियो व टीवी ऑपरेटर के ट्रेड बंद हैं।
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किराये के भवन में चलने वाले इस सबसे पुराने आईटीआई की दुर्दशा को ठीक करने को लेकर आवाज उठाने लगी है। पुराने बंद ट्रेडों को फिर से शुरू करने के साथ नए ट्रेड खोलने को लेकर लामबंदी तेज हो गई।
खोले जाएं नए ट्रेड
खेतीखान गोशनी के निवर्तमान ग्राम प्रधान भैरव ओली का कहना है कि खेतीखान कभी शिक्षा का केंद्र था। इसी के चलते यहां आईटीआई भी खुला था मगर महत्वपूर्ण ट्रेडों के बंद होने से इस संस्थान से नौजवानों को कतई लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संस्थान में नए और उपयोगी ट्रेड खोले जाएं।
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रोजगार दिलाने लायक बनाएं संस्थान को
सामाजिक कार्यकर्ता दिगराज देउपा का कहना है कि खेतीखान के आईटीआई से युवाओं की उम्मीद पूरी नहीं हो पा रही है। इस पुराने तकनीकी संस्थान को इस लायक बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं ताकि यहां के युवाओं को रोजगार मिल सके।
हालात न सुधरे, तो करेंगे आंदोलन
मनीष भट्ट का कहना है कि खेतीखान आईटीआई में न पर्याप्त ट्रेड हैं और न ही स्टाफ। इसकी सबसे ज्यादा मार कमजोर वर्ग के नौजवानों पर पड़ रही है। उनका कहना है कि हालात में सुधार नहीं होने पर जल्द ही आंदोलन की राह अपनाएंगे।
नहीं मिल रहा है आईटीआई का लाभ
गृहणी उषा जोशी का कहना है कि खेतीखान का आईटीआई वर्तमान स्वरूप में रोजगार देने लायक नहीं है। जगह की कमी और अन्य संसाधन नहीं होने से आईटीआई का लाभ क्षेत्र के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। जल्द से जल्द पर्याप्त स्टाफ और नए भवन को तैयार किया जाना चाहिए।
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