भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक (डीजी) कृष्णा चौधरी ने आईटीबीपी की 36वीं वाहिनी परिसर में शस्त्रागार, प्रशासनिक भवन और शिविरपाल भंडार का शुभारंभ किया। पंडित नीरज कुमार पांडेय और पंडित अमित जोशी के पुरोहित्य में पूजा-अर्चना की रस्म पूरी की गई। ये भवन 14.8 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि इस वाहिनी में अगले वित्त वर्ष तक सभी जवानों और अधिकारियों के लिए सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कर दी जाएंगी। अब तक वाहिनी में 28 करोड़ रुपये लागत से विभिन्न निर्माण कार्य हो चुके हैं। इस अवसर पर महानिरीक्षक पुनीत रस्तोगी, डीआईजी राम मेहर सिंह, कमांडेंट आनंद सिंह यरसों मौजूद थे। इससे पहले आईटीबीपी के सेनानी के अलावा द्वितीय कमान अधिकारी भानु प्रताप सिंह, सहायक सेनानी दीपक भट्ट, अभियंता दिवान सिंह, विजय सिंह, डा.वरुण विजय, डा.अंबरीश, डा.रोहिणी हॉमपाल, एसी इंद्रजीत माहरा, विकास कुमार ने डीजी का परंपरागत रूप से स्वागत किया। इस अवसर पर जिला जज प्रेम सिंह, तहसीलदार नीलू चावला, केवीके के प्रभारी डा.संजय चौधरी, डा.एसपी गंगवार, एसएसबी के कमांडेंट रंजीत सिंह, केएमवीएन के निदेशक मुन्ना ढेक, सचिन जोशी, राकेश मांगलिक के अलावा सीपीडब्लूडी के अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार, अभियंता एके अगवारिया, रवि चतुर्वेदी, बीआर द्विवेदी, राकेश कुमार मौजूद थे।
आईटीबीपी की 12 नई बटालियनें बनेंगी
आईटीबीपी के महानिदेशक कृष्णा चौधरी ने कहा कि चीन से लगी भारतीय सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। बृहस्पतिवार शाम पत्रकार वार्ता में उन्हाेंने कहा कि आईटीबीपी के सम्मुख आंतरिक और वाह्य चुनौतियों को देखते हुए अरुणांचल प्रदेश में आठ, उत्तराखंड और हिमाचल में चार नई बटालियनें स्थापित की जाएंगी। इन्हें मिलाकर देश में कुल 68 बटालियनें हो जाएंगी। कहा कि आईआईटी रुड़की के सहयोग से बर्फीले स्थानों में ऐसे भवनों का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 20-22 डिग्री का तापमान बना रहेगा। आज तक वहां पर जवानों को पानी तक नसीब नहीं हो पाता। वे बर्फ पिघलाकर पानी की व्यवस्था करते थे। उन्होंने बताया कि आईटीबीपी द्वारा 12 स्थानों में जवानों के लिए होली डे होम बनाए जाएंगे। जहां हवलदार रेंक से नीचे के कर्मियों को बेहद किफायती कीमत में भोजन और उनके परिवारों को आवासीय सुविधा मिलेगी। सरकार द्वारा पिछले साल 550 करोड़ रुपये तथा इस वर्ष 600 करोड़ रुपये आईटीबीपी को दिए जाने के बाद सभी बटालियनों में आवासीय भवनों की जरूरतों को पूरा किया जाना संभव हो रहा है। 1500 आवासीय भवन, 80 बैरकों का निर्माण करने के साथ अगले तीन वर्षों में हिमवीरों की बुनियादी जरूरतों को पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने उत्तराखंड से अपना पुराना रिश्ता जोड़ते हुए कहा कि आईटीबीपी के जवान उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा में लोगों के लिए बड़ा सहारा बने।