फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यह अमोड़ी डिग्री कॉलेज है, प्राइमरी स्कूल नहीं

Fri, 14 Oct 2016 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
विज्ञापन
यह अमोड़ी डिग्री कॉलेज है, प्राइमरी स्कूल नहीं - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
 टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच पर स्थित अमोड़ी जिले का छठा राजकीय महाविद्यालय है। इस साल जुलाई में खुले इस महाविद्यालय के हाल किसी प्राइमरी स्कूल से अलग नहीं है। स्नातक के इन छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए न कमरें, न फर्नीचर। छात्र-छात्राएं जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। यहीं नहीं हिंदी, अर्थशास्त्र और इतिहास विषय को छोड़कर किसी भी विषय को पढ़ाने के लिए अध्यापक नहीं हैं। 
विज्ञापन


राजकीय महाविद्यालय में 66 छात्र-छात्राओं ने दाखिला लिया। स्नातक में हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, संस्कृत, अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र और शिक्षा शास्त्र विषय को पढ़ाने के लिए महज तीन सहायक प्रोफेसर ही यहां भेजे गए। हिंदी, अर्थशास्त्र और इतिहास को छोड़कर दूसरे विषयों को पढ़ाने के लिए एक भी अध्यापक नहीं। कक्षाओं का संचालन फिलहाल अमोड़ी के जीआईसी के दो कमरों में हो रहा है। यहां फर्नीचर तक की सुविधा नहीं है। अधिकांश वक्त छात्र-छात्राएं बाहर बरामदे में बगैर ब्लैकबोर्ड के पढ़ाई चल रही है।  सामाजिक कार्यकर्ता दीपक बोरा का कहना है कि फर्नीचर की व्यवस्था के लिए विधायक निधि से आग्रह किया गया है।

जिले में उच्च शिक्षा के नए केंद्र तो बढ़ रहे हैं, लेकिन उनमें न कायदे की व्यवस्था है और नहीं छात्र संख्या। अमोड़ी में महज 66 छात्र-छात्राएं हैं। जबकि इससे ज्यादा संख्या जिले के 155 प्राइमरी स्कूलों में हैं। टनकपुर महात्मा गांधी जूनियर हाईस्कूल में तो 350 से अधिक छात्र हैं।
विज्ञापन


कुमाऊं विश्वविद्यालय के पैनल के लिए आग्रह किया गया है। ताकि मान्यता और आगे की प्रक्रिया शुरू हो सके। भवन के लिए जमीन तय कर ली गई है। बजट मिलने पर निर्माण कार्य शुरू कर लिया जाएगा।
डा.एमएस चौहान प्रभारी प्रधानाचार्य, राजकीय महाविद्यालय, अमोड़ी।

देवीधुरा में डाक बंगले में चल रहा डिग्री कॉलेज
 तीन साल में जिले में तीन राजकीय महाविद्यालय खोले गए, लेकिन हालत सभी की बदतर है।  पाटी विकासखंड के देवीधुरा का राजकीय महाविद्यालय डाक बंगले में चल रहा है। जबकि चंपावत विकासखंड के बनबसा का राजकीय महाविद्यालय सरकारी अस्पताल के आवासीय परिसर में चल रहा है। बनबसा के कॉलेज में तो छात्र संख्या महज 55 है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें