जिला मुख्यालय में स्वच्छ भारत मिशन के तहत पांच दिनी अंतरराज्यीय कार्यशाला शुरू हो गई है। पूरे देश को 2019 तक खुले में शौच की प्रथा से मुक्त कराने विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्य विशेषज्ञ अजय सिन्हा ने कहा कि देश के पांच हजार विकासखंडों को वर्ष 2019 तक खुले में शौच से आजादी दिलानी है, जिसके लिए लोगों को अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने के साथ खुले में शौच से होने वाली बीमारियों का मूल्यांकन करने के साथ सभी को सामूहिक रूप से जन जागरूकता की मुहिम चलानी होगी। उन्होंने कहा कि शौचालय न होने से सर्वाधिक महिलाएं पीड़ित होती हैं।
प्रशासनिक अकादमी नैनीताल के उप निदेशक जोगेंद्र बिष्ट ने कहा कि लोगों को खासकर महिलाओं को शौचालय की सुविधा देने, उनमें जागरूकता लाकर बीमारियों के बारे में बताकर खुले में शौच से मुक्ति दिलाई जा सकती है। इससे पहले प्रभारी जिलाधिकारी जेएस राठौर ने विशेषज्ञों की मुहिम की सराहना करते हुए गांवों के निरीक्षण के दौरान मिले अनुभवों को साझा करने की बात कही। जिला विकास अधिकारी विवेक उपाध्याय और परियोजना निदेशक केएन तिवारी ने बताया कि जिले में 82 प्रतिशत शौचालय निर्मित किए जा चुके हैं, शेष में व्यावहारिक कठिनाई आने की जानकारी दी।
कार्यशाला को शिव कुमार, तनु, हजरत, लेखविंदर आदि विशेषज्ञों ने भी संबोधित किया। इस दौरान एसीएमओ डा.रश्मि पंत, बीडीओ शिल्पी पंत, केएस नयाल, सीएस मेवाड़ी, पूरन सिंह रावत, स्वजल प्रबंधक महेंद्र गर्ग आदि मौजूद थे।
सात राज्यों के प्रतिनिधि ले रहे हैं हिस्सा
कार्यशाला में सात राज्यों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड के पुनीत कुमार, मीनू गुलाटी, वेदप्रकाश गोयल, अंकित खंडेलवाल, नसीम अख्तर, सोफी अरदीस, खुर्शीद अहमद, जोहान एरा, रुचि गुप्ता, साफिया वानी, ज्योति सिंध, ए मिश्रा, मृदु शर्मा, सीएम पांडेय, एसके प्रधान, प्रवीन आचार्य सहित 42 विशेषज्ञों ने खुले में शौच से मुक्ति पर विचार रखे।
सुबह गांवों के हालातों का लेंगे जायजा
केंद्र सरकार संचालित कार्यक्रम के तहत आयोजित कार्यशाला के तीसरे दिन 30 प्रतिभागियों की छह टीमें सुबह सवेरे आसपास के गांवों में खुले में शौच के हालातों का जायजा लेंगे। इस दौरान गांवों में शिविर लगाकर लोगों को खुले में शौच न करने के लिए जागरूक किया जाएगा।