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राहत कैंप में ठहरे लोगों ने की घर जाने की जिद, स्वास्थ्य की जांच और खाना-खाने से किया इंकार

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राहत कैंप में ठहराए गए लोगों को समझाते एडीएम टीएस मर्तोलिया, एसडीएम दयानंद सरस्वती व सीओ धीरेंद्? - फोटो : TANAKPUR
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टनकपुर/बनबसा (चंपावत)। राहत कैंप में निगरानी में रखे यात्री अब प्रशासन के लिए सिरदर्द पैदा करने लगे हैं। सरस्वती शिशु मंदिर में निगरानी में रखे गया यात्रियों ने मंगलवार को स्वास्थ्य की जांच कराने के साथ ही खाना खाने से इंकार कर दिया। बाद में एडीएम टीएस मर्तोलिया, एसडीएम दयानंद सरस्वती और कोतवाल धीरेंद्र कुमार ने कैंप में जाकर यात्रियों को समझा कर शांत कराया। इन यात्रियों का कहना है कि उनका क्वारंटीन का समय पूरा हो चुका है, इसलिए उन्हें घर भेजने की व्यवस्था की जाए।
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लॉकडाउन में बाहरी क्षेत्रों से आए यात्रियों को प्रशासन ने यहां विभिन्न राहत कैंपों में निगरानी में रखा है। उनके नियमित स्वास्थ्य की जांच के साथ ही भोजन के व्यवस्था की गई है। सरस्वती शिशु मंदिर में ऐसे 59 लोगों को निगरानी में रखा गया है। मंगलवार को प्रशासन उस वक्त सकते में आ गया जब यात्रियों ने पहले स्वास्थ्य की जांच और फिर खाना खाने से इंकार कर दिया।
सूचना पर एडीएम, एसडीएम और कोतवाल फौरन राहत कैंप पहुंचे। यूपी के इन लोगों का कहना है कि उन्हें राहत कैंप में रहते हुए 18 दिन पूरे हो चुके हैं और अब उन्हें घर भेजा जाए। एडीएम ने कहा कि लॉकडाउन की स्थिति में किसी भी यात्री को घर भेजा जाना संभव नहीं है। यदि किसी यात्री के घर में कुछ परेशानी है तो वहां के प्रशासन को अपनी समस्या बताए।
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इधर बनबसा में एडीएम टीएस मर्तोलिया ने लॉकडाउन के दौरान बाहर से आए लोगों के लिए बनाए राहत शिविरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। शारदा इंटर कालेज में बने राहत शिविर का अपर जिलाधिकारी ने निरीक्षण कर शिविर में संरक्षण लिए गए नेपाली नागरिकों से वार्ता की।
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